नई दिल्ली। पीठ ने कहा, स्वेच्छा से गरीब वादियों का प्रतिनिधित्व करके वकील समाज को सामूहिक रूप से बड़े पैमाने पर यह संदेश दे सकते हैं कि कानूनी पेशा न केवल सिद्धांत में, बल्कि व्यवहार में भी न्याय तक पहुंच और कानून के समक्ष समानता के अधिकार के लिए खड़ा है।


