नई दिल्ली । यह कंटेनर पूरी तरह भारत में डिजाइन और विकसित किया गया है। यह 150 किलो तक का वजन ले जाने में सक्षम है। इसका मुख्य उद्देश्य समुद्र के बीच तैनात उन जहाजों तक तुरंत मदद पहुँचाना है, जो तट से बहुत दूर हैं। आपातकालीन स्थिति में जब किसी जहाज को जरूरी कलपुर्जों, उपकरणों या दवाइयों की जरूरत होगी, तब इस कंटेनर का इस्तेमाल होगा।
इससे भारतीय नौसेना की रसद पहुंचाने की क्षमता काफी बढ़ जाएगी।
इस महत्वपूर्ण तकनीक को विकसित करने में कई संस्थानों ने योगदान दिया है। विशाखापत्तनम की 'नेवल साइंस एंड टेक्नोलॉजिकल लेबोरेटरी' (NSTL) इस पूरे प्रोजेक्ट की मुख्य लैब है। आगरा की 'एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट' (ADRDE) ने इसका पैराशूट सिस्टम तैयार किया है। बेंगलुरु के 'सेंटर फॉर मिलिट्री एयरवर्थनेस एंड सर्टिफिकेशन' (CEMILAC) ने उड़ान के लिए जरूरी मंजूरी और सर्टिफिकेट दिए। वहीं, हैदराबाद की 'डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी' (DRDL) ने परीक्षण के दौरान तकनीकी और उपकरणों से जुड़ी सहायता दी।
भारतीय नौसेना की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एडीसी-150 सिस्टम को बहुत कम समय में तैयार किया गया है। इसके सभी विकासात्मक परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे हो चुके हैं। अब उम्मीद है कि इसे बहुत जल्द भारतीय नौसेना में शामिल कर लिया जाएगा। इससे गहरे समुद्र में तैनात नौसैनिकों को किसी भी संकट के समय तेजी से सहायता मिल सकेगी।


