जबलपुर। गौ तस्करी व मॉब लिंचिंग के बहुचर्चित मामले में 14 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाने के बाद इंटरनेट मीडिया पर मिली धमकियों को हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया है। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि ऐसी गतिविधियां सीधे तौर पर न्यायिक स्वतंत्रता और न्यायिक अधिकारियों के निडर होकर कार्य करने में बाधा डालती हैं।
युगलपीठ ने उपद्रवियों के खिलाफ की गई कार्रवाई के संबंध में प्रदेश के पुलिस महानिदेशक तथा अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) से तीन दिनों के भीतर हलफनामा प्रस्तुत करने को कहा है।
तबस्सुम खान को सुरक्षा दी गई
गौरतलब है कि जजों की सुरक्षा से संबंधित संज्ञान याचिका की सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने सिवनी मालवा में पदस्थ महिला न्यायाधीश तबस्सुम खान को गौ तस्करी व मॉब लिंचिंग के बहुचर्चित मामले में 14 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाने के बाद इंटरनेट मीडिया पर मिली धमकियों को गंभीरता से लिया। याचिका की सुनवाई के दौरान युगलपीठ को बताया गया कि नर्मदापुरम की पुलिस अधीक्षक ने अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश तबस्सुम खान को सुरक्षा प्रदान कर दी है।
न्यायिक अधिकारी को धमकाने का माहौल
युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि नर्मदापुरम में न्यायिक अधिकारी के लिए भय का माहौल बना दिया गया है। ऐसी गतिविधियां सीधे तौर पर न्यायिक स्वतंत्रता और न्यायिक अधिकारियों के निडर होकर कार्य करने में बाधा डालती हैं। युगलपीठ ने कहा कि नर्मदापुरम की पुलिस अधीक्षक यह भी बताएं कि उन लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है, जिन्होंने न्यायिक अधिकारी को धमकाने का माहौल बनाया है।
युगलपीठ ने इस मामले में पुलिस महानिदेशक तथा अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह विभाग) को तीन दिनों के भीतर व्यक्तिगत हलफनामा प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई नौ जुलाई को निर्धारित की गई है।

