अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने भारत से आयात होने वाले सोलर मॉड्यूल पर प्रारंभिक तौर पर 126% तक का भारी शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है। विभाग का कहना है कि जांच में यह पाया गया कि भारत ने सोलर मैन्युफैक्चरिंग को ऐसे सब्सिडी समर्थन दिए, जिससे वहां के निर्यातकों को अमेरिकी घरेलू उत्पादकों की तुलना में सस्ते दाम पर उत्पाद बेचने का लाभ मिला।
इंडोनेशिया और लाओस पर भी तय किए गए प्रारंभिक शुल्क
इसी जांच के तहत इंडोनेशिया पर 86% से 143% और लाओस पर करीब 81% तक के प्रारंभिक शुल्क भी तय किए गए हैं। अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि विदेशी सब्सिडी के कारण इन देशों के सोलर उत्पाद अमेरिकी बाजार में अनुचित प्रतिस्पर्धा पैदा कर रहे थे।
डेवलपर्स और उपभोक्ताओं दोनों को होगा नुकसान
हालांकि इन शुल्कों का उद्देश्य घरेलू सोलर उद्योग को बढ़ावा देना बताया जा रहा है, लेकिन इससे सोलर सेक्टर में लागत बढ़ने और अनिश्चितता गहराने की आशंका भी जताई जा रही है। इससे सोलर प्रोजेक्ट डेवलपर्स और उपभोक्ताओं दोनों के लिए कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है।
अमेरिकी टैरिफ को लेकर अनिश्चितता
ये प्रस्तावित शुल्क ट्रंप प्रशासन के व्यापक वैश्विक टैरिफ से अलग हैं, जिन्हें हाल ही में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था। इसके बाद प्रशासन ने 10% के नए टैरिफ लागू किए हैं, जिन्हें बढ़ाकर 15% तक करने की चेतावनी भी दी गई है। इसी महीने अमेरिका और भारत के बीच व्यापार तनाव कम करने के उद्देश्य से एक द्विपक्षीय व्यापार समझौता भी हुआ था।
सोलर मॉड्यूल आयात को लेकर क्या कहते हैं आकड़े?
आंकड़ों के अनुसार, 2025 की पहली छमाही में अमेरिका के कुल सोलर मॉड्यूल आयात का लगभग 57% हिस्सा भारत, इंडोनेशिया और लाओस से आया था। इससे पहले अमेरिका द्वारा कुछ दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों पर कड़े शुल्क लगाने के बाद डेवलपर्स ने इन देशों से सोर्सिंग बढ़ा दी थी।
वाणिज्य विभाग के मुताबिक, 2024 में अमेरिका ने भारत से लगभग 792.6 मिलियन डॉलर के सोलर आयात किए, जो 2022 की तुलना में नौ गुना से अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतने ऊंचे शुल्क लागू होने पर भारतीय सोलर पैनल निर्माताओं के लिए अमेरिकी बाजार लगभग बंद हो सकता है।
अंतिम रिपोर्ट 6 जुलाई को हो सकती है जारी
अमेरिकी सोलर उद्योग समूह अलायंस फॉर अमेरिकन सोलर मैन्युफैक्चरिंग एंड ट्रेड ने ही इस जांच की मांग की थी। समूह का कहना है कि यह कदम अमेरिकी निर्माण क्षमता, निवेश और रोजगार की सुरक्षा के लिए जरूरी है।
वहीं, वाणिज्य विभाग की अंतिम रिपोर्ट 6 जुलाई को जारी होने की संभावना है। इसके साथ ही भारत, इंडोनेशिया और लाओस से आयातित सोलर सेल्स पर एंटी-डंपिंग जांच भी समानांतर रूप से चल रही है, जिसका असर वैश्विक सोलर सप्लाई चेन और व्यापार संबंधों पर पड़ सकता है।


