नई दिल्ली । दिल्ली के शहरी ढांचे को आधुनिक बनाने और आम लोगों का मेट्रो कॉरिडोर के नजदीक घर का सपना साकार करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला किया है। राजधानी में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) पॉलिसी-2026 लागू की जा रही है।
यह नीति न केवल दिल्ली में जमीन की किल्लत का समाधान निकालेगी, बल्कि ऊंची इमारतों व बेहतर कनेक्टिविटी के जरिये राजधानी को भविष्य के शहर की कतार में खड़ा कर देगी।
नई व्यवस्था में अधिकतम एफएआर 500 तक की अनुमति है, जिसमें 65 फीसदी हिस्सा आवासीय उपयोग के लिए अनिवार्य होगा। शेष 35 फीसदी क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियों, दफ्तरों और अन्य सुविधाओं के विकास की अनुमति हाेगी, जिससे रोजगार और सेवाओं का विस्तार हो सकेगा।
अब बिल्डर और डवलपर कम जमीन पर ज्यादा ऊंची और आधुनिक इमारतें बना सकेंगे। पहले इसके लिए कम से कम एक हेक्टेयर जमीन की जरूरत थी, लेकिन अब मात्र 2,000 वर्ग मीटर के छोटे प्लॉट पर भी 500 एफएआर का लाभ मिल सकेगा। फ्लैट का आकार 100 वर्ग मीटर से कम रखा जाएगा, ताकि किफायती बने रहें और मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोग मेट्रो के पास बजट में घर खरीद सकें।
आवास, रोजगार एवं सुविधाएं होंगी एक दायरे में : मेट्रो, नमो रेल और भारतीय रेलवे के मौजूदा, निर्माणाधीन व प्रस्तावित कॉरिडोर के 500 मीटर के दायरे में आवासीय, व्यावसायिक समेत दूसरी नागरिक सुविधाओं का एकीकृत विकास किया जा सकेगा।
इस मॉडल का मकसद लोगों को कार्यस्थल के करीब घर उपलब्ध कराना, ट्रैफिक दबाव कम करना और सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को बढ़ावा देना है। ट्रांजिट आधारित इस शहरी योजना में आवास, रोजगार और सुविधाओं को एक ही दायरे में लाने पर जोर दिया गया है।
सिंगल विंडो सिस्टम राह करेगा आसान
इस नीति में छोटे डवलपर को भी शामिल करने के लिए न्यूनतम प्लॉट साइज को घटाकर 2,000 वर्गमीटर किया गया है।
इसके अलावा, विभिन्न शुल्कों को मिलाकर सिंगल टीओडी चार्ज लागू किया गया है और सभी मंजूरियों के लिए सिंगल विंडो सिस्टम की व्यवस्था की गई है।
नई नीति में लगभग 207 वर्ग किमी क्षेत्र कवर किया गया है, जिसमें करीब 80 वर्ग किमी ऐसा इलाका है, जो पहले इसके दायरे से बाहर था।
इन क्षेत्रों में अनधिकृत कॉलोनियां, कम आबादी वाले रिहायशी क्षेत्र और लैंड पूलिंग जोन शामिल हैं।


