एम्सटलवीन । भारतीय महिला हॉकी टीम का एफआईएच महिला हॉकी विश्व कप में सफर समाप्त हो गया। भारत को दूसरे दौर के अपने आखिरी मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 0-0 से ड्रॉ पर संतोष करना पड़ा। इस नतीजे के साथ ऑस्ट्रेलिया ने अधिक गोल करने के आधार पर सेमीफाइनल में जगह बना ली, जबकि भारतीय टीम अंतिम-4 की दौड़ से बाहर हो गई।
सेमीफाइनल के लिए भारत को जीत जरूरी थी
भारत के लिए यह मुकाबला करो या मरो का था। सेमीफाइनल में पहुंचने के लिए टीम को हर हाल में जीत दर्ज करनी थी, जबकि ऑस्ट्रेलिया के लिए ड्रॉ भी पर्याप्त था। दिन के पहले मुकाबले में नीदरलैंड्स ने चीन को 4-1 से हराकर उसकी उम्मीदें खत्म कर दी थीं। इसके बाद भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच मुकाबला सीधे सेमीफाइनल की आखिरी जगह के लिए बन गया था।
शुरुआती दबाव में भारत, रेफरल से मिली राहत
मुकाबले की शुरुआत में ही ऑस्ट्रेलिया ने भारत को दबाव में डाल दिया। ऑस्ट्रेलिया ने एक करीबी प्रयास में गोल कर दिया था, लेकिन गेंद भारतीय खिलाड़ी ज्योति के शरीर के ऊपरी हिस्से से टकराकर नेट में गई। भारत ने तुरंत रेफरल लिया और टीवी अंपायर ने इसे खतरनाक खेल करार दिया। इस फैसले से भारत ने राहत की सांस ली और स्कोर 0-0 पर बरकरार रहा।
पेनल्टी कॉर्नर का मौका भी नहीं भुना सका भारत
पहले हाफ के खत्म होने से ठीक पहले भारत के पास बढ़त लेने का शानदार मौका आया। टीम को पेनल्टी कॉर्नर मिला, लेकिन ऑस्ट्रेलियाई डिफेंस ने भारत की रणनीति को पढ़ते हुए खतरा टाल दिया। इसके बाद निक्की प्रधान को भी मौका मिला, लेकिन वह शॉट पर ठीक से कनेक्ट नहीं कर सकीं और गेंद उनके पैर से लग गई।
ऑस्ट्रेलियाई डिफेंस के आगे बेबस दिखा भारत
दूसरे हाफ में भारतीय टीम ने गोल की तलाश में लगातार दबाव बनाया। खिलाड़ियों ने ऑस्ट्रेलियाई डिफेंस को भेदने की पूरी कोशिश की, लेकिन मजबूत ऑस्ट्रेलियाई रक्षापंक्ति के सामने भारत की एक नहीं चली। समय बीतने के साथ भारत की मुश्किल बढ़ती गई और आखिरकार मुकाबला गोलरहित ड्रॉ पर समाप्त हुआ।
अजेय शुरुआत के बाद थमा भारत का सफर
इस ड्रॉ के साथ ऑस्ट्रेलिया ने सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली, जबकि भारत की अंतिम-4 में पहुंचने की उम्मीदें टूट गईं। भारतीय टीम ने टूर्नामेंट की शुरुआत अजेय रहते हुए की थी। उसने चीन और इंग्लैंड के खिलाफ ड्रॉ खेला, जबकि दक्षिण अफ्रीका को 6-1 से हराकर दूसरे दौर में जगह बनाई थी। हालांकि, दूसरे दौर में गत चैंपियन नीदरलैंड्स के खिलाफ 0-2 की हार के बाद भारत के लिए ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जीत जरूरी हो गई थी, लेकिन टीम यह लक्ष्य हासिल नहीं कर सकी।


