आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से हुए एक और ऐतिहासिक प्रक्षेपण के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख नारायणन ने उपलब्धि को बेहद खास बताया। उन्होंने एनवीएस 03 उपग्रह (NVS-03) के प्रक्षेपण के बाद कहा, नेविगेशन उपग्रह के सफल प्रक्षेपण पर वैज्ञानिकों के साथ देशवासियों और मिशन से जुड़े तमाम इंडस्ट्री पार्टनर्स को बधाई।
उन्होंने बताया कि जीएसएलवी एफ 18 रॉकेट की मदद से उपग्रह को सटीकता से कक्षा में स्थापित किया गया। इसरो के मुताबिक यह मिशन लगातार GSLV मिशनों के बीच 56 दिनों के न्यूनतम समय में पूरा हुआ, जो उपलब्धि को बेहद खास बनाता है।
किस तरह की मदद मिलेगी
इसरो प्रमुख डॉ नारायणन ने वैज्ञानिकों की टीम, उद्योग जगत के भागीदारों और शिक्षाविदों को इस उत्कृष्ट उपलब्धि के लिए बधाई देते हुए कहा, जीएसएलवी रॉकेट की सभी प्रणालियों ने उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन किया। उन्होंने कहबा कि एनवीएस-03 की सफलता से देश की नाविक प्रणाली (NavIC) अपनी न्यूनतम परिचालन क्षमता (4 उपग्रह) पर बहाल हो गया है। पहले से ही 3 उपग्रह सफलतापूर्वक काम कर रहे थे। अब एनवीएस-03 स्थिति, नेविगेशन और समय से जुड़ी सेवाओं को बहाल करने में मददगार साबित होगा।
गगनयान को लेकर कैसी हैं इसरो की तैयारियां?
इसरो प्रमुख ने भावी मिशनों और गगनयान मिशन की तैयारियों पर भी सकारात्मक सूचना दी। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक गगनयान मिशन के लिए भी तन्मयता के साथ काम कर रहे हैं। आने वाले दिनों में इसरो एनवीएस 04 और एनवीएस 05 उपग्रहों को प्रक्षेपित करने की तैयारियां भी कर रहा है। दोनों की तैयारियां उन्नत चरण में हैं।
इसरो का नाविक देश के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
इसरो प्रमुख नारायणन ने बताया कि नाविक (NavIC) एक रणनीतिक राष्ट्रीय संपत्ति है। यह मौजूदा स्थिति, नेविगेशन और समय सेवाओं तक स्वतंत्र पहुंच प्रदान करता है। इसका उपयोग ट्रेनों, वाहनों और जहाजों की वास्तविक समय निगरानी जैसे नागरिक अनुप्रयोगों में भी होता है। उन्होंने कहा कि NavIC समूह 'एक राष्ट्र, एक समय' परियोजना का एक महत्वपूर्ण घटक है। NVS-03 उपग्रह के प्रक्षेपण के बाद नारायणन ने बताया कि एक स्वदेशी परमाणु घड़ी पहले ही कक्षा में स्थापित है। सितंबर में प्रक्षेपित EOS-05 भू-इमेजिंग उपग्रह भी पूरी तरह काम कर रहा है और उत्कृष्ट डेटा दे रहा है।
एनएवीआईसी (नाविक) - भारत की स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली
एनएवीआईसी की मदद से पूरे भारत में और अपनी सीमा से 1,500 किमी तक नेविगेशन में मदद मिलेगी। मौजूदा स्थिति, नेविगेशन और समय पर अपडेट मुहैया कराने के अलावा ये भारत की नेविगेशन स्वायत्तता को भी मजबूत करता है। एनवीएस-03 उपग्रह सामरिक मोर्चे के साथ-साथ आम नागरिकों का भी सहयोग करेगा।


