दफ्तर में ये ख़बर आग की तरह फैलने लगी कि कल जो विमल तेज बुखार में तप रहा था आज उसका कोविड-19 टेस्ट पॉजिटिव आया है। अब सबके बीच सुगबुगाहटें बढ़ने लगीं।
"अरे कल ही तो मैंने उसके कंप्यूटर पर बैठकर काम किया था "
"हां यार कल ही तो वो मेरे केबिन में भी आया था "
"और उनके सेक्शन की एक महिला के साथ कल मैंने बैठकर समाचार पत्रों के कोटेशन भी खोले थे "
कहीं हम सब भी करोना पॉजिटिव तो नहीं!!! जल्द से जल्द टेस्ट होना चाहिए हम सबका!! दफ्तर को सील कर दिया जाना चाहिए। सफाई सैनिटाइजेशन के सख्त इंतजाम होने चाहिए। आदि - इत्यादि ।
अब ये सारी स्थिति वरिष्ठ सक्षम प्राधिकारी के समक्ष रखी गई। साहब बोले -: " अरे घबराने की कोई बात नहीं। कार्यालय को बहुत अच्छे तरीके से सैनिटाइज कराया जाएगा। डोंट वरी। "
साहब के इतना कहने भर से ही पीठ पीछे बातें करने वाले सामने एकदम भीगी बिल्ली बने सर झुकाए हाथ जोड़े खड़े रहे... किसी की हिम्मत ही नहीं हुई कि वो पूछें.... " तो सर कल से हमें दफ्तर तो नहीं आना ना???
कोई इतना पूछने की हिम्मत जुटा पाता इससे पहले ही साहब ने अपने भौंहों को ऊपर उठा तेज रोबदार आवाज में कहा -: "लेकिन दफ्तर बंद नहीं होगा और जैसे अब तक ऑफिस का काम चल रहा था उसी सामान्य तरीके से आगे भी जारी रहेगा... और जहां तक बात है विमल की कोविड-19 टेस्ट की और संबंधित इलाज में उसका जो भी खर्चा हुआ होगा वो सब मेडिकल पॉलिसी के अंतर्गत उसको रीइंबर्स कर दिया जाएगा... "
सक्षम प्राधिकारी के ये शब्द सुनकर सभी का मुंह खुला का खुला रह गया और सब मन ही मन ये सोचने लगे कि और अगर वह नहीं बच सका तो क्या उसकी जिंदगी का " रीइंबर्समेंट " भी साहब कर देंगे !!!! ??? लेकिन कोई ये बोल नहीं सका... सब अपने मन को मसोसकर एक - दूसरे की ओर हतप्रभ नजरों से देखते हुए अपनी अपनी सीट पर जाकर फिर से मुर्दा फाइलों को जीवित करने में सोशल डिस्टेंसिग की बजाए एकजुट होकर दफ्तर के काम करते हुए अपनी - अपनी ड्यूटी करने लगे....