नई दिल्ली । गाजीपुर फल, सब्जी और फूल मंडी से निकलने वाला सड़ा-गला जैविक कचरा अब दिल्ली को रोशन करेगा। दिल्ली कृषि विपणन बोर्ड ने 15 टन प्रतिदिन क्षमता वाले बायो-मेथेनेशन प्लांट को पूरी क्षमता से चलाने की तैयारी की है।
इससे रोज 200 किलोवाट पर्यावरण अनुकूल बिजली तैयार होगी। प्लांट के संचालन और रखरखाव के लिए पांच साल की योजना के तहत निजी एजेंसी का चयन किया जाएगा। इसके लिए 20 अगस्त तक ऑनलाइन प्रस्ताव मांगे गए हैं।
योजना के तहत रोज 15 टन गीला कचरा प्लांट में पहुंचाया जाएगा। पहले कचरे से प्लास्टिक, पत्थर और दूसरे अजैविक पदार्थ अलग किए जाएंगे। उसके बाद क्रशर और श्रेडर से कचरे को बारीक कर डाइजेस्टर में डाला जाएगा। बायोगैस के साथ जैविक खाद यानी स्लरी भी तैयार होगी।
बीएआरसी की तकनीक से बनेगी बिजली
गाजीपुर का प्लांट भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र की निसर्गरुना तकनीक पर आधारित है। इसमें दो प्रीडाइजेस्टर और दो मुख्य डाइजेस्टर लगाए गए हैं। कचरे से बनने वाली बायोगैस को बिजली उत्पादन के लिए इस्तेमाल करने से पहले शुद्ध किया जाएगा। इसके लिए हाइड्रोजन सल्फाइड हटाने की विशेष व्यवस्था है। यह प्रणाली गैस में मौजूद हानिकारक एच2एस का स्तर 1500 पीपीएम से घटाकर 200 पीपीएम से भी कम करेगी।
200 किलोवाट क्षमता के इंजन से उत्पादन
शुद्ध की गई बायोगैस से 200 किलोवाट क्षमता के टेडोम इंजन की मदद से बिजली बनाई जाएगी। प्लांट में संयुक्त बिजली और ऊष्मा उत्पादन इकाई के जरिए करीब 35 प्रतिशत विद्युत दक्षता हासिल करने का लक्ष्य है। मंडी के कचरे का इस्तेमाल सीधे ऊर्जा उत्पादन में किया जाएगा।
कचरे की फीडिंग का भी रखना होगा रिकॉर्ड
एजेंसी को रोजाना मंडी से कचरा लेने, उसकी छंटाई, प्लांट में फीडिंग और परिसर की सफाई का पूरा रिकॉर्ड रखना होगा। बोर्ड ने ठेका प्रक्रिया में अनुभव की शर्त भी रखी है। पिछले सात वर्षों में संबंधित क्षेत्र में बेहतर अनुभव रखने वाली कंपनियों को ही प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा।
मरम्मत और रिसाव रोकना निजी एजेंसी की जिम्मेदारी
दिल्ली कृषि विपणन बोर्ड ने प्लांट को सुचारु रूप से चलाने के लिए निजी एजेंसी की जिम्मेदारी तय करने की तैयारी की है। चयनित एजेंसी पांच साल तक प्लांट के संचालन के साथ सिविल और विद्युत-यांत्रिक रखरखाव की जिम्मेदार होगी। इसमें ढांचे की मरम्मत, रिसाव रोकना, ब्लोअर, गैस बैलून और इंजन कक्ष का रखरखाव शामिल रहेगा।


