दिल्ली । आज शिवरात्रि है। गोमुख और हरिद्वार से कांवड़ लेकर अपने गंतव्य तक पहुंचे कांवड़िये महादेव का जलाभिषेक करने के लिए आतुर हैं। उनके चेहरे पर न किसी तरह की थकावट दिख रही और न नींद। बस उनको अपने महादेव को जल अर्पित करना है।
शहर में पहुंचे कांवड़ियों का महिलाओं ने उनके पैर धोकर, तिलक लगाकर स्वागत किया। इलाके के बुजुर्गों ने भी उन्हें फूल-मालाएं पहनाईं। कई जगहों पर ढोल-बाजे के साथ कांवड़ियों को मंदिरों तक लाया गया। इस दौरान फूलों की वर्षा भी की गई। इस दौरान हर हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारों से सेवा शिविर भी गूंजे। कांवड़ियों से उनके परिजनों और परिचितों का मिलने का सिलसिला देर शाम तक रहा। उधर, अधिकतर जगहों पर भजन-कीर्तन भी हुए।
उधर, मंदिर भी पूरी तरह रंग-बिरंगी लाइटों से सजकर तैयार हैं। तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। पूर्वी दिल्ली के ब्रह्मपुरी, शाहदरा, कृष्णा नगर, दिलशाद गार्डन, यमुना विहार समेत अन्य इलाकों के प्रमुख शिव मंदिरों में तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। मंदिर समितियों की ओर से भक्तों की सुविधा के लिए जल, प्रसाद और दर्शन व्यवस्था को बेहतर बनाया जा रहा है। डाक कांवड़ियों के लिए अलग व्यवस्था की है, ताकि वे बिना ज्यादा इंतजार किए सीधे शिवलिंग पर गंगाजल चढ़ा सकें। डाक कांवड़ियों के लिए जलाभिषेक की प्रक्रिया तेज रखने की विशेष व्यवस्था की गई है। आयोजकों ने कहा कि कई स्थानों पर भजन-कीर्तन, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा होगी। चांदनी चौक स्थित गौरी शंकर मंदिर और मादीपुर के शिव मंदिर में भी कांवड़िये गंगाजल से शिव का जलाभिषेक करेंगे।
जलाभिषेक का संकल्प पूरा करने को शिवभक्तों ने लगाई दौड़
कई सौ किलोमीटर दूर से बीते कई दिनों से अपने कंधे पर कांवड़ लिए शिवभक्त आज भोले बाबा का जलाभिषेक करेंगे। इससे पहले सोमवार को दिल्ली की सड़कों पर अधिक संख्या में कांवड़िये नजर आए। सभी के मन में सिर्फ एक ही इच्छा कि 11 अगस्त से पहले अपने गंतव्य तक पहुंच जाएं, ताकि शिवरात्रि पर भगवान शिव का जलाभिषेक कर सकें। विशेष रूप से डाक कांवड़ लेकर चल रहे शिवभक्त बिना ठहरे अपने शिवालयों और निर्धारित स्थलों की ओर बढ़ते दिखाई दिए। पूर्वी दिल्ली के जीटी रोड, वजीराबाद रोड, पुश्ता मार्ग, शास्त्री पार्क, सीलमपुर, जाफराबाद, मौजपुर और शाहदरा समेत कई प्रमुख मार्गों पर सुबह से ही कांवड़ियों की आवाजाही बनी रही। कंधों पर कांवड़ उठाए और बोल बम के जयकारों के बीच भक्त अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए लगातार आगे बढ़ते रहे।
आस्था के विभिन्न रंग...कहीं शिव का आभार, कहीं सेवा का उपहार
कांवड़ यात्रा किसी के लिए मनोकामना पूरी होने के बाद भगवान शिव के प्रति आभार जताने का जरिया है, तो किसी के लिए शिवभक्ति का अर्थ जरूरतमंद शिवभक्तों की सेवा करना। कांवड़ मार्ग पर इस तरह के कई दृश्य देखने को मिले। कोई अपनी मन्नत पूरी करने के लिए कांवड़ लेकर आया, तो कोई परिवार की सुख-समृद्धि की कामना मन में लिए।
आस्था की यात्रा ने रोकी जीवन की रफ्तार, कई किलोमीटर पैदल चले लोग
कांवड़ यात्रा के लिए शहर के मुख्य रास्ते आम लोगों के लिए बंद कर दिए गए हैं। इससे लोगों को आने जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यातायात के लिए दिल्ली मे मेट्रो खुली है लेकिन मेट्रो के बाहर कांवड़ शिविर लगे होने के कारण कोई यातायात का साधन नहीं है जिस कारण लोगों को कई किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ रहा है। शहीद स्थल, दिलशाद गार्डन, झिलमिल, मानसरोवर पार्क, शाहदरा और वेलकम के आस पास के अन्य क्षेत्रों में जाने के लिए कोई साधन नहीं मिल रहा है।दिलशाद गार्डन स्थानीय निवासी राजन ने बताया कि उनका दफ्तर नंद नगरी के पास है लेकिन रास्ता बंद होने के कारण कोई भी रिक्शा चालक मेट्रो की तरफ नहीं आ रहा है जिस कारण मेट्रो से अपने दफ्तर तक पैदल चल कर जाना पड़ रहा है।


