झारखंड । झारखंड में लाल आतंक के खिलाफ सुरक्षा बलों को बहुत बड़ी कामयाबी मिली है। एक करोड़ रुपये का इनामी और कुख्यात माओवादी कमांडर मिसिर बेसरा गिरफ्तार हो गया है। उसे मंगलवार शाम झारखंड के धनबाद-गिरिडीह सीमावर्ती इलाके से दबोचा गया।
मिसिर बेसरा के साथ दो सक्रिय माओवादी सदस्य भी पकड़े गए हैं। उनके नाम मोछू और सौरभ उर्फ गौरव हैं। इसके अलावा दो स्थानीय ग्रामीणों को भी पकड़ा गया है। पुलिस उनसे पूछताछ कर रही है।
क्या है इस बड़ी कार्रवाई का पूरा सच? पांच मुख्य बातें
एक करोड़ का इनामी गिरफ्तार: केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा एक करोड़ रुपये के इनामी शीर्ष माओवादी नेता मिसिर बेसरा को दबोचा गया।
चार राज्यों में था नेटवर्क: मिसिर बेसरा का प्रभाव झारखंड, बिहार, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में फैला हुआ था।
कई संगीन मामले दर्ज: उस पर हत्या, पुलिस बल पर हमले, रंगदारी और आईईडी धमाकों के दर्जनों मामले दर्ज हैं।
दो सहयोगी भी पकड़ाए: कुख्यात माओवादी मोछू और सौरभ के साथ दो स्थानीय ग्रामीण भी पुलिस की गिरफ्त में आए।
एक ही दिन में दो बड़े झटके: बेसरा की गिरफ्तारी से ठीक पहले 16 नक्सलियों ने पुलिस के सामने सरेंडर किया।
कैसे घिरी नक्सली संगठन की सबसे मजबूत कड़ी, कहां हुई बड़ी चूक?
मिसिर बेसरा गिरिडीह जिले के हरलाडीह का रहने वाला है। वह लंबे समय से सुरक्षा बलों की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल था। संगठन में उसकी भूमिका काफी अहम थी। कोल्हान, सारंडा और पारसनाथ के इलाकों में उसका गहरा प्रभाव था। वह माओवादी संगठन की नीतियां बनाने और अलग-अलग राज्यों में नेटवर्क चलाने का काम करता था। हाल के महीनों में उसके कई करीबी साथियों ने सरेंडर कर दिया था। कई सहयोगी पुलिस अभियानों में पकड़े गए थे। इससे बेसरा का नेटवर्क कमजोर हो गया था। इसी का फायदा उठाकर सुरक्षा बलों ने उसे घेरकर गिरफ्तार कर लिया।
क्या अब पूरी तरह टूट जाएगी माओवादियों की रीढ़?
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि मिसिर बेसरा का पकड़ा जाना माओवादियों के लिए अब तक का सबसे बड़ा झटका है। वह संगठन के कई गहरे राज जानता है। पुलिस उससे लगातार पूछताछ कर रही है। उम्मीद है कि पूछताछ में शीर्ष नेतृत्व, हथियारों की सप्लाई, लेवी वसूली और सुरक्षित ठिकानों को लेकर कई बड़े खुलासे होंगे। पकड़ाए गए ग्रामीणों की भूमिका की भी जांच चल रही है।
एक ही दिन में दूसरा बड़ा झटका
मंगलवार को ही 16 नक्सलियों ने झारखंड पुलिस के सामने सरेंडर किया। इनमें छह नक्सलियों पर 39 लाख रुपये का इनाम था। 128 मामलों में आरोपी और 15 लाख का इनामी संतोष महतो उर्फ बासुदेव दा भी सरेंडर करने वालों में शामिल है।
कौन है मिसिर बेसरा?
मिसिर बेसरा भारत का एक बहुत बड़ा और खूंखार माओवादी नेता है। वह मूल रूप से झारखंड के गिरिडीह जिले के हरलाडीह गांव का रहने वाला है। वह पिछले लगभग चार दशकों से माओवादी संगठन से जुड़ा हुआ था। उसकी गिनती संगठन के सबसे बड़े और फैसले लेने वाले शीर्ष नेताओं में होती थी। वह भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की सेंट्रल कमेटी और पोलित ब्यूरो का बेहद अहम सदस्य रहा है। केंद्र और कई राज्य सरकारों ने उस पर कुल एक करोड़ रुपये घोषित कर रखा था। वह पुलिस की मोस्ट वांटेड सूची में सबसे ऊपर था।
उसका काम क्या था?
माओवादी संगठन के भीतर मिसिर बेसरा का काम बहुत बड़ा और जिम्मेदारी भरा था। वह झारखंड, बिहार, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में नक्सलियों का पूरा नेटवर्क चलाता था। वह संगठन के लिए नीतियां और हमले करने की रणनीति बनाता था। गिरिडीह के पारसनाथ, सारंडा और कोल्हान के जंगलों में उसका पूरा कब्जा था। उस पर हत्या, पुलिस बलों पर घातक हमले, आईईडी ब्लास्ट और रंगदारी (लेवी) वसूलने के दर्जनों संगीन मामले दर्ज हैं। वह अलग-अलग राज्यों में कैडरों को एकजुट करने और हथियारों व पैसों का नेटवर्क संभालने का काम करता था।


