नेटवर्क। अत्यधिक बर्फबारी वाले इलाकों में बर्फबारी से बारिश में 0.87% की बढ़ोतरी देखी गई। कम बर्फबारी वाले इलाकों में 0.5 से 0.87% तक की कमी देखी गई। बर्फ से बारिश वाले इलाकों ने ग्लोबल वार्मिंग के प्रति बढ़ी संवेदनशीलता दिखाई।
ग्लोबल वार्मिंग के कारण एशिया के ऊंचे पहाड़ों में बर्फबारी में भारी गिरावट आ सकती है। वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया है कि 2100 तक सर्दियों में बर्फबारी 25.8 और वसंत में 54.1% तक कम हो सकती है। शोध एनपीजे क्लाइमेट एंड एटमॉस्फेरिक साइंस में प्रकाशित हुआ है।
शोधकर्ताओं ने ऐतिहासिक जलवायु डेटा और भविष्य के मौसम मॉडल का इस्तेमाल करके बारिश और बर्फबारी में बदलाव को समझा और बारिश तथा बर्फबारी के चरणों में बदलाव पर बढ़ते तापमान के प्रभावों का विश्लेषण किया। इसके लिए उच्च पर्वतीय एशिया को चार क्षेत्रों में वर्गीकृत किया।
अत्यधिक बर्फबारी वाले इलाकों में बर्फबारी से बारिश में 0.87% की बढ़ोतरी देखी गई। कम बर्फबारी वाले इलाकों में 0.5 से 0.87% तक की कमी देखी गई। बर्फ से बारिश वाले इलाकों ने ग्लोबल वार्मिंग के प्रति बढ़ी संवेदनशीलता दिखाई। इसमें बर्फबारी की दर बर्फ वाले इलाकों में बर्फबारी से बारिश की 0.87% की बढ़ोतरी या बारिश वाले इलाकों में बर्फबारी से बारिश 0.13% की कमी की तुलना में तीन से पांच गुना तेजी से घट रही थी।
कुछ इलाकों में तेजी से घट रही बर्फबारी
अध्ययन के अनुसार तापमान बढ़ने से बारिश और बर्फबारी के अनुपात में बड़ा बदलाव हो रहा है। कुछ इलाकों में बारिश ज्यादा हो रही है, जबकि बर्फबारी तेजी से घट रही है। जो क्षेत्र ज्यादा ऊंचाई पर हैं, वे और ऊंचाई की ओर बढ़ सकते हैं। ग्लोबल वार्मिंग के कारण अधिकतर इलाकों में बारिश बढ़ेगी, जिससे गर्मियों और शरद ऋतु में 80 फीसदी से ज्यादा पहाड़ी क्षेत्र प्रभावित होंगे।
अरबों लोगों की जल आपूर्ति होगी प्रभावित
अध्ययन से पता चला है कि ये बदलाव जल भंडारण और पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता पर भयंकर प्रभाव डालते हैं। बर्फबारी कम होने से नदियों में पानी की मात्रा घट सकती है। अरबों लोगों की जल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, क्योंकि इन नदियों का पानी कई देशों में इस्तेमाल होता है।
जल संसाधनों की निगरानी जरूरी
शोधकर्ताओं का कहना है कि हमने बर्फ से बारिश की सीमा की पहचान करने के लिए एक अहम उपकरण प्रदान किया है। यह एशिया की पर्वतीय प्रणालियों में जल संसाधन की उपलब्धता की भविष्यवाणी करने के लिए आवश्यक है। अध्ययन बताता है कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए बेहतर योजनाएं बनाने और जल संसाधनों की निगरानी करने की जरूरत है।