नई दिल्ली। अमित कुमत ने कर्ज में डूबने के बाद भी अपना हौसला नहीं गंवाया। यही कारण रहा कि उन्होंने करोड़ों रुपये की कंपनी खड़ी करने में कामयाबी हासिल की। प्रताप स्नैक्स के संस्थापकों में से एक अमित कुमत को कभी नौकरी के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ी थीं।
कॉलेज के समय जिस विचार को उन्होंने नजर अंदाज किया था, उसी विचार से उन्होंने स्नैक्स के बाजार में एक अलग पहचान बनाई।
पद्मश्री और सोवियत लैंड नेहरू अवॉर्ड से नवाजे गए उर्दू तथा हिंदी के महान लेखक व गीतकार साहिर लुधियानवी की एक मशहूर पंक्ति ‘हजार बर्क गिरे लाख आंधियां उट्ठें, वो फूल खिल के रहेंगे जो खिलने वाले हैं' प्रताप स्नैक्स कंपनी के मालिक अमित कुमत पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं। तीन बिजनेस में असफल होने के बाद भी उन्होंने जिंदगी से हार नहीं मानी। उनका सकारात्मक नजरिया और बिजनेस करने का जुनून ही था कि वह आज करोड़ों रुपये की कंपनी के मालिक हैं और बच्चे तो बच्चे, बड़े-बूढ़ों की जुबां पर भी उनके उत्पाद यलो डायमंड का नाम है। उन्होंने अपनी कंपनी प्रताप स्नैक्स की स्थापना 2003 में अपने भाई अपूर्व कुमत और दोस्त अरविंद मेहता के साथ मिलकर की थी। प्रताप स्नैक्स यलो डायमंड ब्रांड के नाम से चिप्स, नमकीन और भी कई तरह के स्नैक्स बनाती है। आज उनकी कंपनी का टर्नओवर लगभग 3,200 करोड़ रुपये है। अमित कुमत की सफलता का राज योग और ध्यान है। वह अपनी सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने के लिए हर सुबह नब्बे मिनट ध्यान और योग जरूर करते हैं। अमित उन हजारों लोगों के रोल मॉडल बन गए हैं, जो बिजनेस तो करना चाहते हैं, लेकिन बार-बार असफल हो जाते हैं। उनकी कहानी बताती है कि सफलता की यात्रा असफलता की राह से होकर गुजरती है।
नौकरी के लिए दर-दर भटके
इंदौर में नौकरी तलाशते वक्त अमित कुमत को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। नौकरी पाने के लिए वह हर रोज मशक्कत करते, लेकिन इसके बाद भी उन्हें अच्छी नौकरी नहीं मिली। आखिरकार उन्होंने अपने पिता के कपड़े के धंधे को नए मुकाम पर ले जाने का फैसला किया। इसके बाद उन्होंने दूसरे व्यवसाय में हाथ आजमाने की सोची। व्यापार जगत में अपना नाम कमाने के लिए उन्होंने 1996 से 1999 के बीच तीन बिजनेस शुरू किए। पहले एक एसएपी ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट की स्थापना की। उन्हें केमिकल क्षेत्र की अच्छी समझ थी। इसलिए उन्होंने एक केमिकल डाई का बिजनेस भी शुरू किया और एक वेबसाइट भी बनाई। उनके तीनों ही बिजनेस काफी अच्छे चल रहे थे। लेकिन शायद किस्मत को यह नागवार गुजरा। एक ही साल में उनके तीनों बिजनेस चौपट हो गए और थकहार कर उन्हें अपने सभी बिजनेस बंद करने पड़े।
बस में सफर करने तक के नहीं थे पैसे
बिजनेस के लिए अमित ने काफी लोन ले रखा था। कंपनी बंद होने के बाद अमित कुमत पर तकरीबन छह करोड़ रुपये का कर्ज हो गया था। वह वित्तीय दलदल में बुरी तरह से फंस गए थे। उन्होंने अपने दोस्तों, परिवारजनों से पैसे उधार लेकर और अपनी जमा पूंजी से जैसे-तैसे अपना कर्ज तो चुका दिया, लेकिन अब वह पाई-पाई के मोहताज हो गए थे। उनके पास न तो पैसे बचे थे और न ही मार्केट वैल्यू। यह समय उनकी जिंदगी का सबसे मुश्किल क्षण था। उनके हालात इतने खराब हो गए थे कि उनके पास बस में सफर करने तक के पैसे नहीं होते थे। बस में बैठने से पहले कई बार सोचते कि बस में बैठूं या पैदल जाऊं।
दाल-चावल खाने से आया आईडिया
अमित को दाल-चावल के साथ पापड़ खाने का बहुत शौक था। उच्च शिक्षा के दौरान इसी से उन्हें चिप्स बनाने का ख्याल आया था। हालांकि, उन्होंने एक स्नैक्स बनाने वाली कंपनी में नौकरी भी की। तीन सफल बिजनेस ठप हो जाने के बाद भी अमित कुमत ने हार नहीं मानी। व्यवसाय को लेकर उनका जुनून ही था कि उन्होंने 100 वर्ग फीट के कमरे में अपने भाई और दोस्त के साथ स्नैक्स बनाने के बिजनेस की शुरुआत की। इस बिजनेस में अमित के लिए चुनौतियां कम न थीं। इससे निपटने के लिए उन्होंने चीज बॉल को मार्केट में लाने पर विचार किया। इसकी मार्केट में मांग के अनुसार उपलब्धता बेहद कम या न के बराबर थी। काफी मशक्कत के बाद उन्हें लखनऊ में एक मैन्युफैक्चरर मिला। इसके बाद उन्होंने लखनऊ में चीज बॉल बनाकर उसे इंदौर व अन्य शहरों में बेचना शुरू किया। वह एक ठेठ भारतीय थे और लोगों की नब्ज पकड़ना अच्छे से जानते थे, इसलिए उन्होंने अपने प्रोडक्ट का दाम काफी कम रखा। इससे उनका यह बिजनेस सरपट दौड़ पड़ा और आज वह स्नैक के बिजनेस में जाना-माना नाम हैं।
युवाओं को सीख
जीवन में सकारात्मक रहना बहुत जरूरी है, इसके बगैर आप लक्ष्य हासिल नहीं कर सकते।
प्रयास करते रहें, एक दिन सफलता आपको जरूर मिलेगी।
जिंदगी में कुछ भी असंभव नहीं है, यदि आप ठान लें, तो आपको कामयाबी जरूर मिलेगी।
अनुभव एक महान शिक्षक है, इसलिए गलतियों से सीखते रहें।
हमेशा कुछ अलग करने का प्रयास करें, यह आपको नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।