नई दिल्ली। जिले की सभी यूनिटों और थानों की पुलिस ने अपने इलाके में ऐसे बदमाशों की लिस्ट तैयार कर उनकी धरपकड़ के लिए अभियान शुरू कर दिया है। दिल्ली पुलिस ने आपराधिक वारदात पर अंकुश लगाने के लिए आपराधिक रिकॉर्ड वाले बदमाशों पर नकेल कसने की तैयारी कर ली है।
सभी जिला पुलिस को ऐसे बदमाशों की पहचान कर उनकी धर पकड़ के निर्देश दिए गए हैं। जिले की सभी यूनिटों और थानों की पुलिस ने अपने इलाके में ऐसे बदमाशों की लिस्ट तैयार कर उनकी धरपकड़ के लिए अभियान शुरू कर दिया है।
मंगोलपुरी का कालीचरण, डाबड़ी का सुनील, शाहदरा का अंकित या फिर सुल्तानपुरी का अरुण, यह ऐसे बदमाश हैं, जिन पर दिल्ली में 40 से लेकर 70 आपराधिक मामले दर्ज हैं। कई ऐसे बदमाश भी हैं, जिन पर सौ से अधिक मामले दर्ज हैं। ऐसे बदमाश पुलिस के लिए चुनौती बने हुए हैं। अधिक आपराधिक रिकाॅर्ड वाले ज्यादातर बदमाश किसी न किसी थाने के घोषित बदमाश हैं। मामलों की छानबीन में पता चला है कि ऐसे बदमाश आपराधिक वारदात को अंजाम ही नहीं देते, बल्कि नए अपराधियों का गिरोह भी चलाते हैं।
बाहरी, उत्तर पश्चिम, बाहरी उत्तरी, द्वारका सहित कई जिलों में इनके गिरोह के बदमाश आए दिन लूटपाट और हत्या जैसे संगीन वारदात को अंजाम देते हैं। ऐसे बदमाशों की गिरफ्तारी कर पुलिस ने अपराधियों की कमर तोड़ने का फैसला किया है। पुलिस ने कई मामलों में लिप्त ऐसे बदमाशों की धरपकड़ के निर्देश दिए हैं। पुलिस मुख्यालय में आला अधिकारियों की आयोजित बैठक में इस बात पर विचार विमर्श करने के बाद यह फैसला लिया गया है। सभी जिला पुलिस को निर्देश दिया गया है कि आपराधिक रिकाॅर्ड वाले बदमाशों की पहचान कर उन्हें जल्द से जल्द सलाखों के पीछे पहुंचाया जाए।
दिल्ली पुलिस ने आपराधिक रिकाॅर्ड वाले बदमाशों की धरपकड़ के लिए भगोड़ाें, घोषित बदमाशों और तड़ीपार बदमाशों पर निगरानी बढ़ा दी है। जिलों की जेल बेल सेल, स्पेशल स्टाफ, वाहन चोरी निरोधक शाखा और सेंधमारी निरोधक दस्ता ऐसे बदमाशों की पहचान करने में जुट गए हैं। पुलिस बदमाशों का डाटा तैयार कर रही है। इसके साथ ही दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने भी लंबित मामलों में भागे हुए बदमाशों की धरपकड़ की कोशिश तेज कर दी है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ज्यादा वारदातों में शामिल बदमाश लगातार अपने ठिकाने बदलते रहते हैं। इसके लिए पुलिस घोषित बदमाशों पर निगरानी रखने के लिए लगातार अभियान चलाती है। पुलिस इस अभियान के तहत घोषित बदमाशों की मूवमेंट के बारे में पता लगाती है। साथ ही यह भी पता करने की कोशिश करती है कि वह किसी आपराधिक वारदात में शामिल तो नहीं हैं। वहीं जेल बेल सेल जमानत पर निकलने वालों पर निगरानी रखती है।