नई दिल्ली । दिल्ली नगर निगम चुनाव में बेशक बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाना बड़ा मसला है, लेकिन निगम चुनाव में ताल ठोक रहे 56 फीसदी उम्मीदवारों ने 12वीं तक ही पढ़ाई की है। करीब 60 उम्मीदवार तो स्कूल भी नहीं गए हैं। इसकी जानकारी एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की उम्मीदवारों की रिपोर्ट से मिली है। दिल्ली राज्य चुनाव आयोग में उम्मीदवारों की शपथ पत्र के विश्लेषण के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की गई है।

1349 उम्मीदवारों में से 1336 को इसमें शामिल किया गया है। इनमें से छह उम्मीदवारों ने पीएचडी की है। सिर्फ 36 फीसदी यानि 487 उम्मीदवारों ने ही उच्च शिक्षा हासिल की है। 12 उम्मीदवार डिप्लोमा धारक हैं। दूसरी तरफ 60 उम्मीदवार निरक्षर हैं जबकि 20 ने खुद को सिर्फ साक्षर बताया है। स्कूली शिक्षा इन्होंने नहीं ली है।

दूसरी तरफ निगम उम्मीदवारों में उनकी संख्या ज्यादा है, जिन्होंने 40 साल की उम्र पार कर ली है। करीब 55 फीसदी उम्मीदवार 41-60 आयु वर्ग में हैं। 40 और उससे कम उम्र के उम्मीदवारों की संख्या करीब 38 फीसदी है। वहीं, पांच फीसदी उम्मीदवार 61-80 वर्ष की आयु वर्ग के हैं।

धनवानों को खूब मिला है राजनीतिक दलों से टिकट
एमसीडी चुनाव लड़ रहे 556 उम्मीदवार करोड़पति हैं, इनमें 151 उम्मीदवारों के पास पांच करोड़ से ज्यादा की संपत्ति है, जबकि 217 उम्मीदवारों की दो से पांच करोड़, 365 उम्मीदवारों के पास 50 लाख से दो करोड़ और 283 उम्मीदवारों के पास 10 लाख से कम संपत्ति है। भाजपा के 162 उम्मीदवार, आम आदमी पार्टी के 148 उम्मीदवार और कांग्रेस के 107 उम्मीदवारों के पास एक करोड़ रुपये से अधिक संपत्ति है। एमसीडी चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों की औसत संपत्ति 2.27 करोड़ रुपये है।
आमने-सामने में आज आप नेता राजकुमार आनंद और कांग्रेस के पूर्व सांसद परवेज हाशमी

निगम के बच्चों के लिए भी जय भीम योजना : राजकुमार
निगम की सत्ता मिलने पर आप दिल्लीवालों को अतिरिक्त क्या देंगे?
दिल्ली में सत्ता मिलने के बाद केजरीवाल सरकार ने बाबा साहब आंबेडकर के सपने को पूरा करने के लिए जय भीम मुख्यमंत्री प्रतिभा विकास योजना को शुरू किया। पिछले दिनों इस योजना में कुछ अड़चन जरूर आई थी जिसे अब दूर कर लिया गया है। निगम की सत्ता में आने के बाद आम आदमी पार्टी इस योजना में कुछ बदलाव करके निगम के स्कूलों में भी इसे लागू करेेगी। हमारा मानना है कि बेहतर शिक्षा ही परिवार को मजबूत बना सकता है।

भाजपा आरोप लगा रही है कि दिल्ली सरकार निगम को फंड ही नहीं देती?
झूठ के पैर नहीं होते। आप के विधायक निगम को अपने विकास फंड से पार्कों में झूले, ओपन जिम व अन्य विकास कार्यों के लिए पैसा दे रहे हैं, लेकिन राजनीतिक कारणों से निगम की सत्ता में बैठी भाजपा ने फंड ही नहीं लगाया। आप जनता के पैसों से जनता को सुविधा देना चाहती है, लेकिन भाजपा को रोड़ा अटकाने के अलावा कुछ नहीं आता। भाजपा केवल काम रोकती है। दिल्ली की सत्ता में आप की सरकार है, निगम में भी केजरीवाल के पार्षद आने के बाद यह झगड़ा ही खत्म हो जाएगा और विकास की गाड़ी तेजी से दौड़गी।

भाजपा कहती है कि निगम में आय के स्रोत सीमित हैं, फिर आप कैसे करेंगे?
जहां नीयत साफ होती है, वहां सब मुमकिन है। भाजपा के पार्षद साठगांठ करके निगम क्षेत्र में अवैध विज्ञापन व अवैध पार्किंग लगवाते हैं और जो पैसा निगम के खाते में जाना चाहिए, वह उनके पार्षद की जेब में चला जाता है। आप की सरकार में ऐसा नहीं होता। हमारी सरकार ने भ्रष्टाचार को खत्म करके दिल्ली का खजाना भरा है। हमारी सरकार ने व्यापारियों के साथ मिलकर उनकी समस्या दूर की।

निगम चुनाव के प्रचार के लिए चार दिन ही शेष हैं, मुख्यमंत्री भी गुजरात में व्यस्त हैं?
ये भाजपा की चाल थी आम आदमी पार्टी को फंसाने के लिए, लेकिन दिल्ली की जनता जागरूक है। पिछले 15 साल से भाजपा ने दिल्लीवालों का शोषण किया है और अब गुजरात और दिल्ली में एक साथ चुनाव करवाकर दिल्लीवालों को धोखा देने में कामयाब नहीं हो पाएंगे। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल गुजरात में रहकर भी दिल्ली के प्रचार पर नजर बनाए हुए हैं। उनकी अनुपस्थिति में आप का हर कार्यकर्ता पार्टी के लिए प्रचार कर रहा है। जैसे जैसे मतदान का समय नजदीक आ रहा है, पार्टी की जीत पास आ रही है।

आम आदमी पार्टी का पूरा प्रचार कूड़े केमुद्दे पर केंद्रित है, इसका जनता के बीच क्या रुझान है?
दिल्ली का एक-एक नागरिक कूड़े की समस्या से परेशान है। दिल्ली के तीनों कोनों में कूड़े के पहाड़ खड़े हो गए हैं, लेकिन भाजपा इसे अभी तक हटा नहीं पाई जबकि पिछले चुनाव में उसने वादा किया था। कूड़े के कारण बीमारी जन्म लेती है। ऐसे में निगम में आने के बाद आप सबसे पहले कूड़े की समस्या को दूर करेगी।
मुस्लिम समुदाय में आप को लेकर रोष : परवेज
नगर निगम चुनाव में कांग्रेस को जीत की कितनी उम्मीद है?
कांग्रेस की वोट प्रतिशतता निगम चुनाव में पहले से काफी बेहतर होगी। अल्पसंख्यकों के इलाके में तो एकतरफा जीत दर्ज करेंगे। आम आदमी पार्टी से अल्पसंख्यक नाराज हैं। उनके सामने सीएए-एनआरसी के विरोध प्रदर्शन और मरकज के बंद होने से अल्पसंख्यक वर्ग सरकार से बेहद नाराज है। उत्तर पूर्वी दिल्ली हिंसा मामले में मुख्यमंत्री ने चुप्पी साध ली। दोनों समुदायों के जख्मों पर मरहम नहीं लगाया, इससे रोष है।

किन मुद्दों पर कांग्रेस चुनाव लड़ेगी?
कांग्रेस इस चुनाव में विकास के मुद्दे पर लड़ेगी। सड़क, प्रदूूषण और स्वच्छता की हालत बिगड़ने से निगम पर लगातार कर्ज बढ़ता गया। इससे कर्मियों को वेतन भुगतान में देरी सहित कई समस्याएं हुई हैं। पिछले वर्षों के दौरान बदहाल हुई दिल्ली को मेरी चमकती दिल्ली बनाएंगे। विकास कार्यों को नई रफ्तार देने की जरूरत है। सात वर्ष में केजरीवाल सरकार या भाजपा शासित निगमों में कूड़े को हटाने के लिए कोई माकूल इंतजाम नहीं किए गए।

निगम में नीतियों को लागू करने में क्या कमियां हैं?
अगर नीयत साफ हो तो नीतियों को लागू करना आसान है। निगम में जितने विभाग और नीतियां हैं, अगर उन्हें सही मायने में लागू किया गया तो राजस्व घाटे को कम किया जा सकता है। वार्डों के परिसीमन के बाद अपने फायदे के लिए अल्पसंख्यकों और अनुसूचित जाति के मतदाताओं का बिखराव हुआ। कांग्रेस को इसका भी फायदा मिलेगा, क्योंकि दिल्लीवासी दोनों पार्टियों की नीयत समझ चुके हैं।

दिल्ली नगर निगम के चुनाव में पार्टी के सामने बड़ी चुनौती क्या है?
चुनाव कोई भी हो, हरेक पार्टी के समक्ष चुनौतियां भी होती हैं। राजनीति में उतार चढ़ाव चलता रहता है। इससे निपटने के लिए पार्टी के तमाम नेता और कार्यकर्ता जीतोड़ मेहनत कर रहे हैं। रोजाना 10-12 घंटे तक वार्डों में होने वाली बैठक और जनसभाओं में दोनों पार्टियों की नाकामियों को भी रखा जा रहा है।

मतदाता आखिरकार कांग्रेस के साथ क्यों होंगे?
कांग्रेस मेरी चमकती दिल्ली बनाने के लिए शीला दीक्षित कार्यकाल को दोहराएगी। निगम से जुड़ीं सभी सुविधाओं को आम लोगों के लिए आसान बनाया जाएगा।