पलवल । पलवल में सोहना रोड स्थित सचिन अस्पताल के डॉक्टरों और एंबुलेंस चालक की लापरवाही से बुधवार देर रात चार महीने के बच्चे ने तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया। ठंड लगने से विनायक की तबीयत बिगड़ गई थी। अस्पताल के डॉक्टरों ने इलाज के लिए उसे दिल्ली रेफर कर दिया। इलाज के लिए दिल्ली स्थित कलावती अस्पताल ले जाते समय पलवल से दस किलोमीटर दूर पृथला के पास बघौला में एंबुलेंस में रखे सिलिंडर में ऑक्सीजन खत्म हो गई।

इस वजह से बच्चे की मौत हो गई।

 

विनायक की मौत के बाद चालक बीच रास्ते में ही एंबुलेंस छोड़कर भाग गया। इसके बाद बच्चे को लेकर परिजन करीब डेढ़ किलोमीटर तक पैदल चलते रहे, फिर ऑटो कर एक अस्पताल ले गए। वहां पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। मौत का कारण ऑक्सीजन ककी कमी बताया।


हथीन गेट चौकी प्रभारी प्रीतम सिंह ने बताया कि अभी इस मामले में 174 की कार्रवाई की गई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। परिजनों ने घटना को लेकर हंगामा किया। उनका कहना था कि उनके बच्चे की मौत एंबुलेंस चालक व डॉक्टरों की लापरवाही से हुई है। उनके खिलाफ लापरवाही बरतने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया जाए।

चौकी प्रभारी ने बताया कि मामले में न्यू बस्ती शमशाबाद के रहने वाले मुकेश कुमार ने शिकायत दर्ज करवाई है। उनका चार माह का बच्चा ठंड के कारण पिछले कई दिनों से बुखार से पीड़ित था। उन्होंने अपने बच्चे विनायक को जिला नागरिक अस्पताल में भर्ती कराया। 23 नवंबर को उसकी खराब हालत को देखते हुए उसे नागरिक अस्पताल से सचिन अस्पताल में भर्ती करा दिया। वहां के डाक्टरों ने उसकी खराब हालत देखते हुए बच्चे को दिल्ली के कलावती अस्पताल रेफर कर दिया।

परिजन बोले, नशे में था चालक
डॉक्टरों ने ही सुंदर नाम के एक व्यक्ति को एंबुलेंस लेकर बुलाया। डॉक्टर और अस्पताल में मौजूद कर्मचारियों ने बच्चे को एंबुलेंस में बैठा दिया और बच्चे को ऑक्सीजन लगा दी गई। एंबुलेंस जब गांव बघौला के नजदीक पहुंची तो सिलिंडर में ऑक्सीजन खत्म हो गई और बच्चे की हालत बिगड़ गई। उन्होंने चालक से कहा कि पास के ही अस्पताल में ऑक्सीजन मिल जाएगी, मगर एंबुलेंस चालक बोला कि वह फरीदाबाद 15 मिनट में पहुंच जाएंगे।

वह जैसे ही बल्लभगढ़ के सेक्टर 23 पहुंचे तो एंबुलेंस चालक ने उन्हें एक क्लीनिक के नजदीक छोड़ दिया। वह तुरंत क्लिनिक में भागे, मगर वहां उन्हें ऑक्सीजन नहीं मिली। इतने में ही चालक मौके से एंबुलेंस समेत फरार हो गया। परिजनों का आरोप है कि चालक ने शराब पी हुई थी। उन्होंने पुलिस को इस बारे में शिकायत भी दी है।

एंबुलेंस में नहीं था कोई स्टाफ, ऑक्सीजन की जांच नहीं की
नियमानुसार जब किसी बच्चे या ऐसे मरीज को फरीदाबाद या दिल्ली के बड़े अस्पतालों में रेफर किया जाता है तो एंबुलेंस में मरीज के साथ एक नर्सिंग स्टाफ को भेजा जाता है। ताकि रास्ते में किसी तरह की दिक्कत होने पर मरीज की देखभाल की जा सके। इसके अलावा एंबुलेंस में आक्सीजन सिलिंडर में पूरी आक्सीजन होनी चाहिए तथा वेंटीलेटर की सुविधा होनी चाहिए, लेकिन उस एंबुलेंस में कोई सुविधा नहीं थी।

इसे लेकर भी परिजनों ने चिकित्सकों पर भी लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। रेफर करते समय अस्पताल प्रशासन व चालक ने एंबुलेंस में मौजूद आक्सीजन सिलिंडर की जांच नहीं की। परिजनों का कहना है कि एंबुलेंस में मौजूद आक्सीजन सिलिंडर का मीटर भी खराब था।