जहानीखेड़ा । असल जिंदगी की कहानियां कभी-कभी फिल्मों को भी मात देती हैं। जमुका गांव की सरोजिनी और उसके मंगेतर आदित्य की कहानी ऐसी ही है। यह आपको राजेन्द्र कुमार की फिल्म आरजू या शाहिद कपूर वाली विवाह की याद दिला देगी। सरोजिनी और आदित्य की शादी पिछले साल तय हुई। इस साल 12 मई को फेरे होने थे लेकिन एक अप्रैल को हादसे में आदित्य घायल हुए और जान बचाने को उनका एक पैर घुटने से काटना पड़ा।

रिश्तेदारियों में खुसर-फुसर शुरू हुई तो सरोजिनी अड़ गई। बोली-फेरे तो उन्हीं संग लूंगी। शादी के बाद उनका पैर कट जाता तो...? कोई जवाब नहीं था। 12 मई को आदित्य सरोजिनी को ब्याह लाए।

शादी से 34 दिन पहले कटा पैर

हरदोई के हन्न पसिगवां गांव के आदित्य की शादी लखीमपुर खीरी जिले के पसगवां थानाक्षेत्र के जमुका गांव की सरोजिनी से तय हुई थी। कक्षा आठ पास सरोजिनी के पिता रामशंकर खेती करते हैं। उसकी मां की मौत हो चुकी है। पिता, दादी-बाबा ने पालन पोषण किया है। सरोजनी के दो छोटे भाई हैं। पिछले साल जून में तिलक हो गया था। इस साल 12 मई को शादी थी। इधर आदित्य के पिता कलक्टर खेती के साथ एक छोटा टेंट हाउस चलाते हैं। आदित्य चार भाई, चार बहन हैं।

भाइयों में तीसरे नंबर के आदित्य टेंट हाउस संभालते हैं। आदित्य के पिता कलक्टर बताते हैं-एक अप्रैल की देर रात गांव से जहानीखेड़ा जाते वक्त हिकसी वाहन ने आदित्य की बाइक को टक्कर मार दी। वह घायल हो गया। शाहजहांपुर ले गए और फिर वहां से लखनऊ। लखनऊ में 4 अप्रैल को पैर की प्लास्टिक सर्जरी हुई। लेकिन इन्फेक्शन फैल गया। जान बचाने को पैर काटना पड़ा।

उसके सवाल पर सब खामोश रहे

परिवार सदमे में था। उधर सरोजिनी के कुनबे पर भी मानो पहाड़ टूट पड़ा। रिश्तेदारी की औरतों में खुसर पुसर शुरू हो गई। टांग कट चुकी है... लड़का कैसे कमाएगा.. क्या करेगा... सरोजिनी की शादी उससे कैसे की जाए...। बातें सरोजिनी तक पहुंचीं तो वह अड़ गई। उसका एक ही सवाल था- अगर शादी के बाद यह हादसा होता तो? किसी के पास जवाब नहीं था। दोनों परिवारों ने बात की और 12 मई को धूमधाम से दोनों ने फेरे लिए।

26 दिन अस्पताल में रहकर की आदित्य की देखभाल

आदित्य के पिता कलक्टर बताते हैं कि एक्सीडेंट की जानकारी मिलने के बाद सरोजिनी भी लखनऊ स्थित अस्पताल पहुंच गई। 26 दिन तक आदित्य की देखभाल की और अस्पताल से छुट्टी होने के बाद ही वह अपने घर गई।