नई दिल्ली | सुप्रीम कोर्ट ने यमुना नदी में प्रदूषण से संबंधित मुद्दे पर खुद संज्ञान लिया। कोर्ट ने हरियाणा सरकार को दिल्ली जल बोर्ड की याचिका पर भी नोटिस जारी किया जिसमें शिकायत की गई थी कि हरियाणा द्वारा अत्यधिक प्रदूषित पानी छोड़ा जा रहा है।

इधर, यमुना नदी में हर साल दिसंबर से फरवरी के बीच अमोनिया की मात्रा में बढ़ोतरी पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) द्वारा गठित निगरानी समिति ने गंभीरता से लिया है। यमुना निगरानी समिति ने केंद्रीय प्रदूषण नियंणत्र बोर्ड (सीपीसीबी) को नदी में अमोनिया बढ़ने के मुख्य श्रोत (कारण) का पता लगाने और सुधार के लिए समुचित कदम उठाने को कहा है।


दिल्ली सरकार के पूर्व मुख्य सचिव शैलजा चंद्रा और एनजीटी के पूर्व विशेषज्ञ सदस्य बी.एस. साजवान की समिति ने सीपीसीबी से इस बारे में 10 जनवरी तक रिपोर्ट पेश करने को कहा है। समिति ने मीडिया में आई उस खबर पर संज्ञान लेते हुए यह आदेश दिया है जिसमें कहा गया है कि वजीराबाद के पास यमुना नदी में अमोनिया का स्तर बढ़कर 7 पीपीएम (पार्ट्स पर मिलियन) हो गया, जबकि तय मानक के हिसाब से यह 0.8 पीपीएम से अधिक नहीं होना चाहिए। इसके साथ ही, दिल्ली जल बोर्ड ने भी आरोप लगाया है कि बार-बार ध्यान दिलाए जाने के बावजूद हरियाणा ने औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले गंदे पानी का बहाव रोकने के लिए समुचित कदम नहीं उठाया है। साथ ही जल बोर्ड ने सीपीसीबी से तुरंत समाधान के लिए उपाय करने का आग्रह भी किया है।