श्रीडूंगरगढ़ | कहते हैं इस दुनिया में माँ से ज्यादा ताकतवर कोई नहीं होता। माँ इस दुनिया की सबसे बड़ी योद्धा होती है। वह अपने कलेजे के टुकड़े के लिए मौत से भी लड़ जाती है।

अब मामला प्रदेश के श्रीडूंगरगढ़ तहसील के लाडेरा गांव में इसके उलट एक मां इतनी निर्दयी हो गई कि, उसने अपने कलेजे के टुकड़े को हाड़ कंपकंपाने वाली ठंड में बिना कपड़ों के कंटीली झाड़ियों में फेंक दिया। बच्चे के रोने की आवाज सुनकर स्थानीय लोगों ने पुलिस को इस बात की सूचना दी।

उन्होंने बताया कि वे जब इस रास्ते से जा रहे थे तो उन्हें एक नवजात के रोने की आवाज सुनाई दी। बच्चे के रोने की आवाज जिधर से आ रही थी, वहां जाकर देखा तो कंटीली झाड़ियों में एक बच्चा दिखा। हाड़ कंपकंपाने वाली इस ठंड में बच्चे के तन पर एक भी कपड़ा नहीं था। पहले तो बच्चे को कंबल ओढ़ाया और फिर गांव की एएनएम गंगादेवी को मौके पर बुलाया।
एएनएम के आने के बाद बच्चे को 108 एंबुलेंस में श्रीडूंगरगढ़ हॉस्पिटल पहुंचाया। यहां डॉक्टर एसएस नांगल ने उसे संभाला और नवजात को कपड़े मंगवाकर पहनाए। बच्चे की हालत में थोड़ा सुधार होने के बाद उसे बीकानेर के पीबीएम हॉस्पिटल रैफर कर दिया। जहां उसकी हालत में सुधार दिख रहा है।

बच्चे की सबसे पहले आवाज़ सुनकर मदद के लिए आगे आने वाले भूराराम जाट ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ श्रीडूंगरगढ़ थाने में मुकदमा दर्ज करवाया है। वहीं, श्रीडूंगरगढ़ हॉस्पिटल के डॉ. एसएस नांगल ने बताया कि, जन्म के आधे घंटे बाद ही नवजात को झाड़ियों में फेंक दिया गया। कंटीली झाड़ियों में फेंकने के कारण बच्चे के हाथ, पैर, गले और पेट पर कांटे भी चुभ गए। करीब चार से पांच घंटे तक बिना किसी कपड़ों के ठंड में रहने के कारण बच्चे को हाइपोथर्मिया हो गया था, जिससे उसका शरीर नीला पड़ गया।