नई दिल्ली । कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए लागू पाबंदियों के दौरान भारत समेत दुनिया भर में लोगों के मोटापे का शिकार होने की बातें सामने आई हैं। घर में बैठकर लोग मनोरंजन और अच्छे खाने पर ध्यान देते रहे, जिसके चलते उनके वजन में इजाफा देखने को मिला। लेकिन ब्रिटेन में नई समस्या पैदा हुई है। यहां लॉकडाउन के दौरान लोग नशे की लत का शिकार हो गए हैं।

देश में कोरोना संक्रमण के चलते लागू लॉकडाउन से लोगों में तनाव को लेकर चर्चा हो रही है। साथ ही शराब की लत वालों से जुड़ी चिंता भी हो गई है। इसी बीच ब्रिटेन में हुए एक शोध में खुलासा किया गया है कि कोरोना महामारी के दौरान शराब की खपत बढ़ गई।


इससे ब्रिटेन के लाखों लोग नशे की लत में पड़ गए। अध्ययन में बताया गया कि लॉकडाउन ने समाज में हानिकारक प्रभाव डाला है। लंदन के रॉयल कॉलेज ऑफ साइकियाट्रिस्ट के अध्यक्ष व मनोचिकित्सक प्रोफेसर जूलिया सिंक्लेयर ने बताया कि कोरोना संक्रमण के चलते देशभर में लागू लॉकडाउन ने लोगों को घरों में कैद कर दिया। उनका मानना है कि लॉकडाउन ने देश में शराब की खपत बढ़ा दी। उन्होंने बताया कि सामान्य दिनों में लोग शराब पीने के लिए पब आदि जगहों पर जाते थे, यहां घंटों समय लग जाता था। इससे कई बार लोग समय के अभाव के चलते थोड़ी शराब पीकर घर चले जाते थे।

एक सप्ताह में पी जा रहे 50 यूनिट तक शराब
मगर लॉकडाउन के चलते उन्हें घर पर शराब पीने का पर्याप्त मौका और समय मिला। उन्होंने बताया कि अध्ययन में शराब पीने की समस्या का आकलन करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा विकसित ऑडिट नामक स्कोर का इस्तेमाल किया गया। प्रोफेसर जूलिया सिंक्लेयर का कहना है कि शराब पीने वालों में भ्रम या दिमाग में झटके लग सकते हैं। इससे कई बार लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ जाता है। वहीं, कई बार यह मौत का कारण भी बन जाता है। ऐसे में अपने स्वास्थ्य को लेकर सजग रहने की जरूरत है। एनएचएस के मुताबिक, वयस्क लोग प्रति सप्ताह 14 यूनिट से अधिक शराब का सेवन नहीं कर सकते। लॉकडाउन के दौरान यह आंकड़ा 50 यूनिट प्रति सप्ताह तक पहुंच गया। प्रति सप्ताह 50 यूनिट शराब का सेवन स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है।