नई दिल्ली । बाढ़, बारिश, चक्रवात जैसी आपदाओं में अक्सर लोगों की मौत हो जाती है और हम आंकड़ा समझ कर उसे भूल भी जाते हैं। अब संसद में जारी किए गए सरकारी आंकड़े बताते हैं कि देश में पिछले 3 सालों में भारी बारिश, बिजली, बाढ़ और चक्रवात जैसी जल-मौसम संबंधी आपदाओं में 6,811 लोगों की मौत हो गई। सरकार ने यह जानकारी संसद में दी है।

प्राकृतिक आपदाओं से बंगाल, आंध प्रदेश, मध्य प्रदेश केरल में सैकड़ों लोगों की जानें चली गई। वहीं झारखंड, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और बिहार जैसे कुछ राज्यों का डेटा कुछ सालों से गायब थे।

मरने वालों की सूचि में बंगाल सबसे टॉप पर है। यहां ऐसी आपदाओं में कम से कम 964 लोगों की मौत हुई. तो यह कहा जा सकता है कि अप्रैल 2018 से लेकर मार्च 2021 तक होने वाली ऐसी सात मौतों में से एक मौत बंगाल में हुई है। बंगाल के बाद मौतों के आंकड़े में दूसरे नंबर पर हा मध्य प्रदेश। यहां 917 लोगों की मौत हुई है।

केरल 708 मौतों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। अकेले मध्य प्रदेश में 2019-20 में 674 मौतें दर्ज की गईं, जिनमें से ज्यादातर बाढ़ के कारण हैं। झारखंड, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और बिहार जैसे कुछ राज्यों का डेटा कुछ सालों से गायब थे।

जल-मौसम संबंधी आपदाओं में भारी बारिश, बिजली गिरने, चक्रवात, बाढ़, सूखा, हिमस्खलन, गर्मी की लहर और शीत लहर शामिल हैं। केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के पास उपलब्ध आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि 2016 में, भारतीय तट पर आए थे कम से कम चार चक्रवात, जिनमें से केवल एक गंभीर चक्रवात था, 2020 में देश में पांच गंभीर चक्रवातों ने तबाही मचा दी थी।


इसी तरह, बहुत भारी वर्षा और अत्यधिक भारी वर्षा की घटनाएं भी बढ़ रही हैं, मंत्रालय के आंकड़ों से पता चला है। जबकि 2016 में, पूरे भारत में लगभग 1,864 आईएमडी स्टेशनों में बहुत भारी बारिश दर्ज की गई और 226 स्टेशनों पर अत्यधिक भारी बारिश दर्ज की गई। 2020 में 1,912 स्टेशनों पर बहुत भारी बारिश दर्ज की गई और 341 स्टेशनों पर अत्यधिक भारी बारिश दर्ज की गई।