नई दिल्ली । कोरोना वायरस के डेल्टा वेरिएंट ने दुनियाभर के देशों की चिंता बढ़ा दी है। कोरोना के बढ़ते मामले एक ओर जहां भारत में तीसरी लहर की दस्तक के संकेत दे रहे हैं, वहीं दुनिया के कई देशों में डेल्टा कोरोना की चौथी लहर का कारण बनता जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा कि कोरोना के डेल्टा वेरिएंट ने मिडिल ईस्ट यानी मध्य-पूर्व के देशों में चौथी लहर का रूप ले लिया है और वहां कोरोना वायरस के मामलें में तेज वृद्धि की है।

बता दें कि मिडिल ईस्ट के देशों में टीकाकरण दर काफी कम है।

वैश्विक स्वास्थ्य संगठन ने गुरुवार को अपने एक बयान में कहा कि WHO के पूर्वी भूमध्य क्षेत्र के देशों में डेल्टा वेरिएंट की वजह से कोरोना के मामलों में वृद्धि हो रही है और यह वेरिएंट कोरोना से मौतों को बढ़ावा दे रहा है। कोरोना की चौथी लहर को लेकर इलाके के 22 देशों में से अब तक 15 में से रिपोर्ट किया जा रहा है।

इनमें से मिडिल ईस्ट के कई देशों में डेल्टा वेरिएंट कोरोना वायरस का प्रमुख कारण बन रहा है। हालांकि, कोरोना संक्रमण के मामले ज्यादातर उन लोगों में पाए जा रहे हैं, जिन्होंने अब तक वैक्सीन नहीं लगवाई है। कोरोना का यह डेल्टा वेरिएंट मूल वायरस की तुलना में काफी ज्यादा ट्रांसमिसिबल यानी संक्रामक है और चिंता के अन्य ज्ञात वेरिएंट की तुलना में अधिक घातक भी है।

WHO के क्षेत्रीय निदेशक डॉ अहमद अल-मंधारी ने कहा कि पूर्व-मध्य क्षेत्र और अन्य सभी डब्ल्यूएचओ के कार्य क्षेत्रों में डेल्टा वेरिएंट का तेजी से प्रसार चिंता का एक प्रमुख कारण है। हाल के हफ्तों में नए मामलों और मौतों की संख्या में वृद्धि हुई है। अधिकांश नए मामले और अस्पताल में भर्ती कोरोना मरीज बिना टीकाकरण वाले लोग हैं। हम अब पूरे क्षेत्र में कोरोना की चौथी लहर की कैद में हैं।

दरअसल, पिछले महीने की तुलना में इस महीने कोरोना के संक्रमण दर में में 55 प्रतिशत और मौतों में 15 फीसदी की वृद्धि हुई है। इन इलाकों में एक सप्ताह में कोरोना के 310,000 से अधिक मामले और 3,500 मौतें दर्ज की गई हैं। ट्यूनीशिया जैसे देश, जो उत्तरी अफ्रीका में सबसे अधिक कोविड -19 मौतों का सामना कर चुके हैं, इसके प्रकोप को रोकने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।


कोरोना की चौथी लहर का असर इतना भयावह है कि इन देशों में ऑक्सीजन टैंकों और आईसीयू बेड की कमी होने लगी है और हेल्थकेयर सिस्टम पर अब दबाव बढ़ने लगा है। डब्ल्यूएचओ ने पाया है कि डेल्टा वेरिएंट का तेजी से प्रसार इस क्षेत्र में तनाव का प्रमुख कारण बन गया है। जर्नल वायरोलॉजिकल में एक पेपर के अनुसार, 2020 में वायरस की पहली लहर के रोगियों की तुलना में डेल्टा वेरिएंट के रोगियों के पहले परीक्षणों में पाए जाने वाले वायरस की मात्रा 1,000 गुना अधिक थी, जिससे इसकी संक्रामकता बहुत बढ़ गई।