नई दिल्ली | दुनियाभर में तंबाकू की लत के चलते हम हर साल 1.4 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान हो रहा है। इसके चलते स्वास्थ्य पर हो रहे खर्च में भी काफी गिरावट हुई है। यह खुलासा विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ओर से जारी नए तंबाकू टैक्स मैन्युअल में जारी आंकड़ों से हुआ है।

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे दुनियाभर के देश तंबाकू पर टैक्स की नीति को और बेहतर बनाकर कोरोना महामारी के काल में अपनी स्वास्थ्य सुविधाओं को और बेहतर बना सकते हैं। जिससे कोरोना जैसी बीमारी में मरीजों के लिए बेड और वेंटिलेटर जैसे मेडिकल उपकरणों की कमी नहीं हो।

डब्ल्यूएचओं के हेल्थ प्रमोशन विभाग के एन पॉल जूनियर ने बताया कि हमने नीति निर्माताओं, वित्त अधिकारियों, सीमा शुल्क अधिकारियों और तंबाकू नीति में शामिल अन्य लोगों मजबूत तंबाकू टैक्स नीति बनाने और लागू करने के लिए यह ना मैन्युअल लांच किया है। उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है कि यह दस्तावेज़ तंबाकू पर टैक्स बढ़ाने से महत्वपूर्ण लाभ के बारे में बताएगा। साथ ही यहां उपलब्ध कराया गया डाटा दुनियाभर के नीति निर्माताओं के लिए आंख खोलने वाला होगा।

पिछले साल तंबाकू से 80 लाख ने जान गंवाई
एन पॉल जूनियर ने बताया कि मैन्युअल में शामिल बेस्ट बाई न केवल पैसे बचाता है बल्कि यह जिंदगियों को भी बचाता है। उन्होंने बताया कि तंबाकू की मानवीय और आर्थिक लागत बढ़ रही है। पिछले साल तंबाकू कि लत के चलते 80 लाख लोगों ने अपनी जान गंवा दी है।

सिर्फ 38 देशों ने तंबाकू पर पर्याप्त कर लगाए

2018 में केवल 38 देशों (वैश्विक आबादी की 14 फीसदी) ने ही तंबाकू पर ज्यादा और पर्याप्त टैक्स लगाए। इसका अर्थ है कि स्वास्थ्य के हानिकारक इन उत्पादों की कीमत का करीब 75 फीसदी टैक्स लगना चाहिए। तंबाकू पर सही टैक्स लगा कर इससे समाज और स्वास्थ्य को हुए नुकसान की भरपाई की जा सकती है। यह स्वास्थ्य, राजस्व और विकास के लिए एक जीत होगी।

भारत में भी स्थिति चिंताजनक

भारत में भी हर साल तंबाकू के सेवन से छह लाख लोगों की मौत होती है। इनमें से पांच लाख मौतों का प्रत्यक्ष कारण तंबाकू का सेवन है। भारत में 35 प्रतिशत से अधिक वयस्क तम्बाकू का सेवन करते हैं। देश में 6.89 करोड़ वयस्क केवल धूम्रपान का उपयोग करते हैं तो वहीं, 4.30 लोग चबाने वाले तंबाकू और धूम्रपान दोनों का ही सेवन करते हैं।