फरीदाबाद । सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पिछले वर्ष तोड़े गए खोरी गांव की तरह 113 अवैध कॉलोनी अरावली में अभी भी बसी हुई हैं। अवैध कॉलोनियों को नियमित करने के लिए टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग की तरफ से करवाए गए ड्रोन सर्वे में इनकी पहचान हुई है। नगर निगम की परिधि में बसी अवैध कॉलोनियों की मौके पर जाकर भौगोलिक वास्तिवक रिपोर्ट की जांच में नगर निगम की टीम ने इसका खुलासा किया है।

बहरहाल, नगर निगम के अधिकारियों ने नियमित करने के लिए सरकार को इन कॉलोनियों की रिपोर्ट नहीं भेजने का फैसला किया है। इस बारे में अधिकारी जल्द ही टाउन एंड कंट्री प्लांनिग विभाग के अधिकारियों को भी अवगत करवाएंगे। वहीं, अवैध कॉलोनी की पहचान करके नियमित करने की प्रक्रिया में अरावली को शामिल करने के बाद टाउन एंड कंट्री प्लांनिग विभाग के ड्रोन सर्वे पर सवाल खड़े किए जा रहे है।

पर्यावरण प्रेमी विष्णु का कहना है कि अरावली को लेकर कई फैसले सुप्रीम कोर्ट के आ चुके हैं और अरावली में कितना इलाका वन आरक्षित है इस बारे में भी सभी विभाग को अवगत करवाया जा चुका है। यह सूचना वन विभाग की वेबसाइट पर भी दर्ज है। इतना ही नही अरावली को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर कांत एनक्लेव, खोरी गांव तो तोड़ा जा चुका है, बावजूद इसके टाउन एंड कंट्री प्लांनिग विभाग ने अपने सर्वे में अरावली में बसी कॉलोनियों को नियमित करने की सूची में शामिल कर दिया, जो चिंता का विषय है।

डीटीपी इंफोर्समेंट आर शर्मा ने कहा, 'अवैध कॉलोनियों की सूची सरकार को भेजी थी। अब संबंधित विभाग जांच कर रही है। अगर अरावली के वन आरक्षित इलाके में अवैध कॉलोनियों होंगी तो उनको सूची से हटा दिया जाएगा।'

ऐसे हुआ खुलासा

सूत्रों के मुताबिक टाउन एंड कंट्री प्लांनिग विभाग की तरफ से भौगोलिक वास्तविकता जानने के लिए 359 कॉलोनियों की सूची नगर निगम को भेजी गई है। इस सूची की जांच की जा रही है। नगर निगम कर्मचारियों ने इनमें 113 कॉलोनियों को अरावली के राजस्व रिकॉर्ड में पाया है, इस जमीन को वन आरक्षित घोषित किया गया है। सूत्रों का कहना है कि टाउन एंड कंट्री प्लांनिग विभाग ने अरावली में बसी कॉलोनियों को कैसे रिपोर्ट में शामिल कर लिया, यह जांच का विषय है।