नई दिल्ली । कोरोना वायरस के नए स्वरूप ओमिक्रोन से खतरे को देखते हुए दिल्ली में विशेष सावधानी बरती जाएगी। प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों की कोरोना जांच रिपोर्ट नकारात्मक आने पर भी उन्हें सात दिन तक अपने घर में पृथकवास में रहना होगा। आठवें दिन उनकी फिर से आरटीपीसीआर जांच की जाएगी। राजधानी दिल्ली में उपराज्यपाल अनिल बैजल की अध्यक्षता में सोमवार को दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक हुई।

बैठक में केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार उच्च जोखिम वाले देशों से आने वाले सभी यात्रियों की आरटीपीसीआर जांच कराने का फैसला लिया गया। अगर किसी की रिपोर्ट पॉजिटिव आती है तो उन्हें संस्थागत पृथकवास में रखा जाएगा और जीनोम सीक्वेंसिंग की जाएगी। वहीं रिपोर्ट निगेटिव आने पर भी सात दिन तक अपने घर में पृथकवास में रहना होगा। सात दिन के बाद फिर आरटीपीसीआर जांच करानी होगी। यह रिपोर्ट भी नकारात्मक आने पर उन्हें सात दिन तक खुद अपनी सेहत की निगरानी करनी होगी।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई बैठक में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन, कैलाश गहलोत, डॉ. वीके पॉल, डॉ. एसके सिंह, डॉ. रणदीप गुलेरिया, डॉ. एस पांडा व अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

आपात स्थिति से निपटने को स्वास्थ्य विभाग तैयार होगा
बैठक के दौरान दिल्ली में मौजूद स्वास्थ्य सेवाओं, अस्पताल में बिस्तरों की उपलब्धता आदि का समुचित आकलन करने का निर्देश स्वास्थ्य विभाग को दिया गया, जिससे किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटा जा सके। इसके साथ ही टीकाकरण अभियान में तेजी लाने को कहा गया है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों का टीकाकरण किया जा सके।

कोविड बर्ताव पर होगी राजधानी में सख्ती
कोविड अनुरूप बर्ताव का पालन नहीं करने वालों पर राजधानी में अब सख्ती दिखेगी। डीडीएमए की बैठक में ज्यादा से ज्यादा लोगों की जांच करने, कोरोना के मामलों का पता लगाने, उनका उपचार करने, पृथकवास में रखने आदि की रणनीति पर जोर दिया गया। इसके साथ ही कोविड अनुरूप बर्ताव सुनिश्चित कराने के निर्देश भी दिए गए। कोरोना से बचाव के लिए मास्क लगाना एक जरूरी उपाय है। लोगों तक इस संदेश को पहुंचाने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाने पर बल दिया गया। इससे पूर्व बैठक में कोरोना को लेकर दिल्ली में फिलहाल की स्थिति की भी समीक्षा की गई।


नागरिक उड्डयन मंत्रालय के साथ होगा तालमेल
कोरोना के नए वेरियंट की स्थिति को देखते हुए दिल्ली के मुख्य सचिव को इस तरह की व्यवस्था बनाने का निर्देश दिया गया, जिसके जरिए नागरिक उड्डयन मंत्रालय के साथ सीधा और नजदीकी संपर्क रखा जा सके, जिससे किसी भी बदलाव की स्थिति में तत्काल निर्णय लिए जा सके।