नई दिल्ली । मोदी सरकार ने भारी विरोध के बाद आखिरकर पिछले साल बनाए गए तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने का ऐलान कर दिया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े किसान संगठन भारतीय किसान संघ (BKS) ने शुक्रवार को मोदी सरकार के इस कदम का समर्थन किया और कहा कि अनावश्यक विवाद और टकराव से बचने के लिए कृषि कानूनों की वापसी का कदम सही प्रतीत होता है।


हालांकि, संगठन ने किसान नेताओं पर निशाना भी साधा और कहा कि आंदोलन को जारी रखने का उनका 'घमंडी रवैया' छोटे किसानों के लिए फायदेमंद नहीं था। उधर, कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन की अगुआई कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा ने प्रधानमंत्री के फैसले का स्वागत किया है, लेकिन कहा है कि वे संसद से इस पर मुहर लगने की प्रतीक्षा करेंगे। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि मौजूदा आंदोलन तभी समाप्त किया जाएगा जब इन कानूनों को संसद में वापस लिया जाता है और एमएसपी की लीगल गारंटी दी जाती है।

बीकेएस के महासचिव बद्री नारायण चौधरी की ओर से जारी बयान में कहा गया, ''प्रधानमंत्री की ओर से इन तीन कृषि कानूनों को वापस लेने का फैसला सही प्रतीत होता है ताकि अनावश्यक विवादों और टकराव से बचा जाए।'' इसमें आगे कहा गया है, ''इन तथाकथित किसान नेताओं का घमंडी रवैया लंबे समय के लिए छोटे किसानों के लिए फायदेमंद नहीं है, जोकि कुल कृषक समुदाय के 90 फीसदी हैं।'' बीकेएस ने कहा कि बाजारों में किसानों का शोषण किया जाता है और इस मुद्दे को हल करने के लिए, एक ऐसी प्रणाली बनाने की जरूरत है जो किसानों की कृषि उपज के लिए "लाभदायक मूल्य" की गारंटी और सुनिश्चित करे।