नई दिल्ली। कोरोना से संक्रमित वकीलों और उनके परिजनों का इलाज द्वारका में बंद पड़े रॉकलैंड हॉस्पिटल में होगा। उच्च न्यायालय ने इस अस्पताल के मालिक को आदेश दिया है कि वह हॉस्पिटल की चाबी दिल्ली विधिज्ञ परिषद (बीसीडी) के अध्यक्ष रमेश गुप्ता को सौंप दे।

हालांकि अस्पताल के मालिक ने बीसीडी के अध्यक्ष के बजाए जिलाधिकारी (डीएम) या किसी अन्य सरकारी अधिकारी सौंपने की इच्छा जताई।

जस्टिस विपिन सांघी और रेखा पल्ली की पीठ ने बीसीडी के अध्यक्ष व वरिष्ठ अधिवक्ता रमेश गुप्ता से अस्पताल का निरीक्षण करें और इसे कोविड केयर सेंटर के रूप में शुरू कराएं। साथ ही, 6 मई को स्थिति रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया। गुप्ता ने पीठ को बताया कि द्वारका स्थित राकलैंड अस्पताल पूरी तरह से खाली है और बंद पड़ा है। साथ ही कहा कि इस बारे में दिल्ली सरकार से भी बात हुई। अस्पताल में कुल 77 बेड है, साथ ही छह आइसीयू बेड और आक्सीजन सिलेंडर भी हैं।

कोरोना संक्रमण से पीड़ित वकीलों को बेड अक्सीजन व समुचित इलाज नहीं मिलने पर बीसीडी अध्यक्ष गुप्ता सहित कई वकील भावुक होकर रोने लगे थे। गुप्ता ने कहा था कि हर दिन लोगों के मरने की बात आ रही है, हम असाहाय है लोगों की मदद नहीं कर पा रहे हैं। गुप्ता ने कहा था कि हमें एक अस्पताल अटैच करके दिया जाए और आक्सीजन मुहैया कराया जाए, हम डॉक्टर व नर्स, दवाई और एम्बुलेंस का प्रबंध खुद कर लेंगे।

उन्होंने कहा कि बीसीडी ने एक अतिथि गृह का प्रबंध किया है और इसे किसी अस्पताल से अटैच कर दिया जाए ताकि जरूरत पड़ने पर आईसीयू बेड का प्रबंध हो सके। उन्होंने कहा कि रॉकलैंड अस्पताल को बतौर लाइसेंसी ले रहे हैं और इसमें बीसीडी डॉक्टर व नर्स, दवाई और एम्बुलेंस का प्रबंध खुद कर लेंगे।