सुप्रीम कोर्ट ने एक टीवी प्रोग्राम के एपिसोड के प्रसारण पर रोक लगाते हुए कहा कि न्यूज चैनलों पर होने वाली डिबेट और एंकर की भूमिका पर कई तल्ख टिप्पणी की है। ''भारत विविधता भरी संस्कृतियों वाला देश है।

मीडिया में स्व-नियंत्रण की व्यवस्था होनी चाहिए'' जैसे लाइनों का प्रयोग करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि टीवी पर बहस (डिबेट) के दौरान पत्रकारों को निष्पक्ष होना चाहि। सुप्रीम कोर्ट ने सुदर्शन टीवी के एक कार्यक्रम ‘यूपीएससी जिहाद’ के खिलाफ दाखिल की गई याचिका पर सवाल उठाते हुए यह सख्त टिप्पणी की।

दरअसल सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई थी सुदर्शन न्यूज चैनल के कार्यक्रम को लेकर। जिसमें यूपीएससी जिहाद का मुद्दा उठाया गया था। याचिका में कार्यक्रम पर बैन लगाने की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरा सुदर्शन न्यूज चैनल के वकील ने कहा कि ये कार्यक्रम खोजी पत्रकारिता के आधार पर तय किए गए हैं। इसलिए इनपर कोई बैन नहीं लगाना चाहिए। जिसके जवाब में सुप्रीम कोर्ट  ने कहा कि ये कौन सी खोजी पत्रकारिता है जिसमें गलत तथ्य दिखाए जाते हैं। दरअसल, चार कार्यक्रम इस मुद्दे पर सुदर्शन न्यूज प्रसारित कर चुका है जिसमें कहा गया था कि मुसलमानों को ज्यादा उम्र तक यूपीएससी की परीक्षा देने के मौके दिए जाते हैं और ज्यादा संख्या में मुसलमानों को मौके देने का प्रावधान किया गया है। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये सरासर गलत जानकारी है जो कि कार्यक्रम में प्रसारित की गई है। साथ ही सॉलिसिटर जनरल से पूछा कि जो चार एपिसोड प्रसारित किए गए उनकी निगरानी आपने की या नहीं। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट इस बात की इजाजत किसी को नहीं दे सकता कि यूपीएससी जिहाद जैसे शब्दों का इस्तेमाल करे और ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करे जिसमें कहा जाए कि मुस्लिम सिविल सेवा में घुसपैठ कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पत्रकारिता के नाम पर किसी कौम के खिलाफ नफरत फैलाने की अनुमति सुप्रीम कोर्ट नहीं दे सकता है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई तक सुदर्शन न्यूज के कार्यक्रम पर रोक लगाने का काम किया है।


डिबेट में एंकर के रोल को देखने की जरुरत

सुनवाई के दौरान जस्टिस जोसेफ ने कहा कि डिबेट में एंकर के रोल को देखने की जरूरत है। ज्यादातर समय एंकर बोलते हैं और स्पीकर को म्यूट करके सवाल पूछते रहते हैं। जस्टिस चंद्रचूड़ ने सवाल किया कि मौजूदा मामले में एंकर ने सवाल उठाया कि कैसे एक ग्रुप विशेष के लोग सिविस सर्विसेज में एंट्री कर रहे हैं। इस तरह के छल और घातक आरोप यूपीएससी एग्जाम पर सवाल उठा रहा है। इस तरह का आरोप बिना किसी आधार के हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि क्या विचार की अभिव्यक्ति को बचाने के लिए मीडिया का सेल्फ रेग्युलेशन नहीं होना चाहिए। जिस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि लोकतंत्र में अगर प्रेस को कंट्रोल किया गया तो ये विनाशकारी होगा। इंटरनेट पर भी तो लाखों लोग लिखते है। जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि क्या हम एक को रेग्युलेट इसलिए ना करें क्योंकि सभी को रेग्युलेट नहीं कर सकते?