नई दिल्ली | उच्च न्यायालय ने कहा है कि 10वीं और 12वीं कक्षा के प्रमाणपत्र जारी होने के 10 साल बाद भी सीबीएसई छात्र के नाम में माता-पिता का सरनेम जोड़ने से इनकार नहीं कर सकता। उच्च न्यायालय ने एमबीबीएस की पढ़ाई कर चुकी छात्रा के हक में यह फैसला दिया है।

न्यायालय ने सीबीएसई को छात्रा के नाम में उसके पिता का सरनेम जोड़ने और नए सिरे से 10वीं और 12 वीं कक्षा के प्रमाण पत्र जारी करने का निर्देश दिया है।

मुख्य न्यायाधीश धीरू भाई नारायणभाई पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने सीबीएसई की ओर से उच्च न्यायालय के एकलपीठ के फैसले के खिलाफ दाखिल अपील का निपटारा करते हुए आदेश दिया है। पीठ ने सीबीएसई की उन दलीलों को सिरे से नकार दिया, जिसमें तय नियमों का हवाला देते हुए कहा गया था कि प्रमाण पत्र जारी होने के 10 साल बाद नाम बदलना या इसमें संशोधन नहीं किया जा सकता है। न्यायालय ने सभी तथ्यों और परिस्थतियों पर विचार करने के बाद कहा कि प्रमाणपत्र में छात्र के नाम के साथ उसके माता-पिता का सरनेम (टाइटल) जोड़ना नाम बदलने या संशोधन के समान नहीं है। न्यायालय ने कहा है कि यह नाम बदलने का     मामला नहीं है, बल्कि सिर्फ सरनेम जोड़ने का है।


ज्योति अब मेडिकल की उच्च शिक्षा प्राप्त करने विदेश जा सकेंगी। उच्च न्यायालय में मामले की सुनवाई के दौरान बताया गया कि ज्योति एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर चुकी है और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के जनरल मेडिकल काउंसिल द्वारा संचालित प्राठ्यक्रम पीएएलएबी में दाखिला लेना चाहती है।

यह मामला है
उच्च न्यायालय में दाखिल मामले में अनुसार एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर चुकी ज्योति के दसवीं व बारहवीं कक्षा के प्रमाणपत्रों में उसके पिता का सरनेम नहीं है। इसकी वजह से विदेश के मेडिकल कालेज में दाखिले के लिए आवेदन नहीं कर पाई। तब उसने सीबीएसई से अपने नाम में पिता का सरनेम जोड़ने की मांग की। सीबीएसई ने इनकार कर दिया था।

क्या है नाम बदलने का सीबीएसई का नियम
9वीं से 12वीं कक्षा तक के प्रमाणपत्रों में जारी होने के 10 साल के भीतर ही नाम बदलने या इसमें संशोधन हो सकता है। इसके लिए दो अखबारों (हिंदी और अंग्रेजी) में नाम बदलने के लिए विज्ञापन प्रकाशित करना होगा। साथ में न्यायाधिक दंडाधिकारी/ प्रथम श्रेणी मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट, कार्यकारी मजिस्ट्रेट, एसडीएम के द्वारा सत्यापित हलफनामे की मूल प्रति। सरकारी गजट में नाम बदलने की मांग को लेकर प्रकाशित विज्ञापन की प्रति। तय शुल्क और स्कूल त्याग प्रमाण पत्र सीबीएसई के समक्ष जमा करना होगा।