नई दिल्ली | दिल्ली की अर्थव्यवस्था में प्लास्टिक उद्योग की महत्ती भूमिका है। लेकिन, कोरोना से बचाव के तहत घोषित बंदी के बाद प्लास्टिक उद्योग पूरी तरह से प्रभावित हो गया है। ऐसे में कोरोना काल में प्लास्टिक उद्योग में मांग की मार पड़ी है। नतीजतन पूरा प्लास्टिक उद्योग सुस्त पड़ गया है।


दिल्ली में प्लास्टिक उत्पादों के उद्यमी और बहादुरगढ़ रोड स्थित एशिया की सबसे बड़ी प्लास्टिक मार्किट के अध्यक्ष सुरेंद्र भारती के मुताबिक कोरोना काल में प्लास्टिक उद्योग मंदी की मार झेल रहा है। उन्होंने बताया कि स्कूली बच्चों के लिए एसेसरीज से लेकर प्लास्टिक के घरेलू उपकरण तैयार करता है, जबकि ऑटोमोबाइल्स क्षेत्र में होने वाले प्लास्टिक की मांग भी दिल्ली के उद्यमी करते हैं। लेकिन इन दिनों स्कूल बंद हैं, वहीं लोग भी घर से बाहर कम निकल रहे हैं। नतीजतन मांग प्रभावित हुई है। ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ प्लास्टिक इडस्ट्री के अध्यक्ष रामानंद गुप्ता के मुताबिक, मांग कम होने की वजह से ट्रांसपोर्टेशन व्यवस्था का बहाल न होना भी एक प्रमुख वजह है।

80 फीसदी धन फंसा पड़ा है
कोरोना काल में प्लास्टिक उद्यमियों का धन फंसा हुआ है। ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ प्लास्टिक इडस्ट्री के अध्यक्ष रामानंद गुप्ता के मुताबिक, मांग कम है, तो पुराना क्रेडिट जो है, वह फंसा हुआ है। वहीं बंदी के दौरान आय प्रभावित होने से उद्यमियों पर कर्ज भी हो चुका है। इसका असर भी उद्योग पर देखने को मिल रहा है। प्लास्टिक उद्यमी और बहादुरगढ़ प्लास्टिक मार्केट के अध्यक्ष सुरेंद्र भारती के मुताबिक, इस दौरान 80 फीसदी तक पिछला धन फंसा हुआ है। वहीं उद्यमी मांग ना होने के कारण और अनिश्चिता के चलते लोन लेने से घबरा रहे हैं। नतीजतन उद्योग में नकदी संकट भी बना हुआ है।

एक शिफ्ट ही चल रहा काम
मजदूरों के पलायन की मार भी प्लास्टिक उद्योग पर पड़ा है। हालांकि, ऑनलाइन के चरणों के साथ ही स्थितियों में कुछ सुधार हुआ है और मजदूर वापस लौट रहे हैं, लेकिन प्लास्टिक उद्योग को जरूरत के मुताबिक मजदूर अभी नहीं मिल पाए हैं। प्लास्टिक उत्पादों के उद्यमी और बहादुर गढ़ प्लास्टिक मार्केट के अध्यक्ष सुरेंद्र भारती के मुताबिक, बीते कुछ दिनों में मजदूर लौटे हैं, लेकिन अब भी 50 फीसदी मजदूर ही वापस लौट पाए हैं। इस वजह से जो उद्योग पहले दो शिफ्ट में चलते थे वह एक शिफ्ट में चल रहे हैं।