राम नवमी के अवसर पर लखनऊ के राजकीय कन्या अनाथालय, राजकीय शिशु गृह तथा राजकीय महिला शरणालय में सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट पौलोमी पाविनी शुक्ला द्वारा कन्या-पूजन किया गया। इस कार्य में उनके साथ उनकी माताजी आराधना शुक्ला IAS उनके पति प्रशांत शर्मा IAS भी उपस्थित थे।

इन गृहों में कुल 96 बालिकाएं 11-18 वर्ष की आयु, 24 बालिकाएं 5-10 वर्ष की आयु, 42 शिशु 5 वर्ष से कम आयु के और 31 महिलाएं आवासित हैं।

कन्या-पूजन के साथ-साथ पौलोमी पाविनी शुक्ला ने इन अनाथ लड़कियों को मिठाई, खान-पान की सामग्री तथा पिज़्ज़ा भी वितरित किए। इस कार्य में लखनऊ के श्शोभित अग्रवाल व बरेली के रोहित ने भी सहयोग किया।

राम नवमी के पर्व पर सुश्री पौलोमी के इस कार्य का उद्देश्य है समाज के संपन्न व्यक्तियों को अनाथ बच्चों के हित के लिए कुछ करने हेतु प्रेरित करना है, कोई भी त्यौहार तभी सार्थक होगा जब समाज के निःशक्त वर्ग भी इसमें शामिल हो सकें तथा उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आ सके।

सुश्री पौलोमी सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट होते हुए पिछले 5 वर्षों से अनाथ बच्चों को समाज में समान अधिकार दिलाने के लिए कार्यरत हैं। इसी सिलसिले में इन्होंने पृथ्वी के सर्वाधिक निःशक्त- भारत के अनाथ (Weakest on Earth - Orphans of India) पुस्तक लिखी, जो कि प्रकाशन संस्था Bloomsbury द्वारा प्रकाशित की गई। साथ ही, इसी उद्देश्य से पौलोमी पाविनी शुक्ला ने सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका भी दायर की हुई है, जो सुनवाई के लिए लंबित हैं। सुश्री पौलोमी पाविनी शुक्ला गत कई वर्षों से, सपरिवार, प्रत्येक त्यौहार, जैसे दीपावली आदि अनाथ बच्चों के साथ मनाती हैं। समय - समय पर इनके द्वारा अनाथ बच्चों के लिए दान अभियान भी चलाया जाता है।